Gautam Buddha Story in hindi (महात्मा बुद्ध की प्रेरक कहानियां)

दोस्तों गौतम बुद्ध के बारे में कहा जाता है कि वह एक महान व्यक्ति थे और उनके जीवन को अगर पढ़ लिया जाए तो दुनिया भर का ज्ञान अर्जित किया जा सकता है। आज हम इंक लैब की तरफ से आपके लिए लेकर आए हैं उनके जीवन की चार प्रमुख कहानियां जो आपको अपने अभी तक के ज्ञान के बारे मे सोचने पर मजबूर कर देंगी। आइए जानते हैं गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी चार प्रेरणादायक कहानियां। (Inspirational Gautam Buddha Story for Kids.) 

गौतमबुद्ध और स्वर्ग की कहानी (Gautam Buddha and the Story Of Heaven) 

Gautam Buddha and the Story Of Heaven: दोस्तों भारत में जब भी परिवार के किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तब सब यही चाहते हैं कि परिवार का यह सदस्य स्वर्ग जाए। ऐसा ही एक व्यक्ति के साथ भी हुआ। वह चाहता था कि उसके मृत पिता स्वर्ग जाएं। उस समय भी, अभी के जैसे ही लोग हुआ करते थे जो कि यात्राओं का प्रबंधन करते थे। वह व्यक्ति ऐसे कई लोगों के पास गया जो कि यात्राओं का प्रबंधन करते थे, पर उनमे से कोई भी यह पक्का नहीं कर सकता था कि उस व्यक्ति के पिताजी स्वर्ग ही जायेंगे। 

इतने लोगों के यहां चक्कर काटने के बाद वह व्यक्ति काफी परेशान हो गया। तभी उसे पता चला कि गौतम बुद्ध उसके शहर में ही मौजूद हैं। वह भागकर गौतम बुद्ध के पास गया।

उस समय बुद्ध होने का यह मतलब माना जाता था कि आपके भगवान के साथ सीधे संपर्क हैं। और इसका मतलब था कि उसके पिताजी सीधा स्वर्ग जा सकते थे अगर गौतम बुद्ध चाहते। 

वह बुद्ध के पास गया। बुद्ध उस समय एक झील के किनारे, पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और अपने अनुयायियों से किसी बात पर विमर्श कर रहे थे। यह व्यक्ति उनके पास पहुंचा और उन्हें अपनी समस्या बताई। समस्या सुनने के बाद गौतम बुद्ध कुछ बोलने ही वाले थे, तभी उस व्यक्ति ने कहा कि कृपया मना मत करियेगा, मैं आपके पास बड़ी उम्मीद लेकर आया हूं। 

गौतम बुद्ध ने इस पर कहा कि अब मैं क्या कर सकता हूं तुमने मुझपर बड़ा दबाव डाल दिया है। अब मैं मना नहीं कर सकता। ऐसा करो अभी घर जाओ, कल सुबह चार बजे स्नान करने एक मटका लेकर आना। उस मटके में आधे पत्थर भरना और आधा मक्खन भरना और उसके कपड़े से बांधकर मेरे पास ले आना। उसके बाद यह देखा जाएगा कि तुम्हारे पिताजी के साथ क्या किया जा सकता है। 

उस व्यक्ति के पिता स्वर्ग जाने वाले थे इसलिए वह तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था। उसने बड़ा सा मटका लिया। उसे पत्थरों और मक्खन से भरा और बड़ी ही मुश्किलों से गौतम बुद्ध के पास लेकर आया। बुद्ध ने कहा कि इस मटके के साथ झील के तीन चक्कर लगाइए। उस व्यक्ति ने भारी मटके को लेकर चक्कर लगाए और बुद्ध के सामने आकर खड़ा हो गया। बुद्ध ने कहा कि अब झील में चले जाओ और पानी के छाती तक पहुंचने तक जाते जाओ। व्यक्ति ने वही किया। 

उसके बाद बुद्ध ने कहा कि मटके को डूबा दो। व्यक्ति ने मटका डूबा दिया। अब बुद्ध ने कहा कि एक छड़ी उठाओ और मटके को एक बार में तोड़ दो। बुद्ध ने कहा कि अगर तोड़ने पर कंकड़ पत्थर तैरें और मक्खन डूब जाएं तो समझ जाना कि तुम्हारे पिताजी स्वर्ग चले गए। व्यक्ति ने यही किया और पत्थर डूब गए, मक्खन तैरने लगा। 

व्यक्ति निराश होकर जाने लगा तभी उसे याद आया कि पत्थर तो तैर ही नहीं सकते। वह बुद्ध के पास वापस आया और उनसे कहा कि यह तो प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है। पत्थर कहाँ तैरते हैं और मक्खन कहाँ डूबते हैं।

इस पर बुद्ध ने बहुत गंभीरता से कहा कि मैं भी तो यही कहना चाहता हूं कि प्रकृति का नियम यही है। अगर तुम्हारे पिताजी पत्थर होंगे तो नीचे जाएंगे और मक्खन होंगे तो ऊपर आयेंगे। यही तो प्रकृति का नियम है, इसमे मैं क्या कर सकता हूं। 

गौतम बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी (Angulimal and the Gautam Buddha Story) 

Angulimal and the Gautam Buddha Story: गौतम बुद्ध के समय एक बहुत बड़ा अपराधी हुआ करता था, जिसका नाम था अंगुलिमाल। अंगुलीमल का नाम अंगुलिमाल इसलिए था क्योंकि उसने अपने जीवन में प्रण लिया था कि वह 101 लोगों की उँगलियाँ अपने गले में काटकर लटकाएगा। उसने 100 लोगों की उँगलियाँ काट भी ली और उसका लक्ष्य केवल एक और व्यक्ति की उंगली काटना था। जिस शहर में यह सब हो रहा था, इत्तेफाक से गौतम बुद्ध भी उसी शहर मे पहुंच गए। लोगों ने उन्हें अंगुलीमल के बारे में बताया। यह सब सुनकर गौतम बुद्ध उस तरफ चल पड़े जिस तरह अंगुलिमाल रहा करता था। लोगों ने कहा कि वहाँ मत जाइए। वह इंसान नहीं है, इंसान के रूप में राक्षस है। वह कोई ऐसा इंसान नहीं है जिसे आप उपदेश देकर समझा सकते हैं। हालांकि इन सब बातों का बुद्ध पर कोई असर नहीं हुआ और वह उस रास्ते पर चले गये जहां अंगुलिमाल रहता था।

वहाँ कुछ देर चलने के बाद उन्हें अंगुलिमाल मिला। उसने दूर से ही बुद्ध को डराने के लिए ललकारा। हालांकि बुद्ध पर इसका कोई खास असर नहीं हुआ और उन्होंने अंगुलिमाल को नजरअंदाज कर दिया और चलते चले गए। पहले तो अंगुलिमाल चौंका और उसके बाद उसने बुद्ध को ललकारते हुए कहा कि तुम कौन हो जो मुझे नजरअंदाज करके चलते जा रहे हो। 

इस पर बुद्ध ने मुड़कर कहा कि मैं कहा चलता जा रहा हूं। मैं तो स्थिर हूं। चल तो तुम रहे हो। 

अंगुलिमाल ने कहा कि तुम पागल आदमी हो क्या? मैं स्थिर हूं, चल तुम रहे हो। इस पर बुद्ध ने कहा कि नहीं चल तुम रहे हो। अपने लक्ष्य की तरफ। 101 लोगों के लक्ष्य की तरफ। मैं स्थिर हूं क्योंकि मैंने अपने लक्ष्य प्राप्त कर लिए हैं। अब ऐसा करो मेरी जिन्दगी को खत्म कर दो और तुम भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लो। और सुनो ऐसा करो ना कि मेरा सर लगा लो अपने हार में। 100 उंगलियों के बीच में मेरा सर काफी अच्छा लगेगा। 

Gautam Buddha Story kids
Baby Buddha aka Siddharth

ये सब सुनकर अंगुलिमाल ने अपना माथा पीट लिया। किसी को मारने का मजा तब है जब उसे मार का डर हो। अंत में अंगुलिमाल को यह बात दिल पर लगी और उसने जानना चाहा कि यह आदमी ऐसा क्या प्राप्त कर चुका है जो इसे मरने का भी डर नहीं। अंगुलीमल बुद्ध के अनुयायी बन गए और आगे चलकर उनके सबसे सफल और सबसे ज्यादा प्रसिद्ध अनुयायियों में से एक माने गए। 

गौतम बुद्ध और आनंद की कहानी (Buddha Story Of Anand and His Condition) 

Buddha Story Of Anand and His Condition: गौतम बुद्ध के एक चचेरे भाई थे जिनका नाम आनंद था। वह बुद्ध की तरह ही सन्यासी बनना चाहते थे। इसलिए वह बुद्ध के पास गए। वहाँ जाकर उन्होंने बुद्ध को कहा कि वह सन्यासी बनना चाहते हैं लेकिन उनकी एक शर्त है। बुद्ध यह जानते थे कि एक व्यक्ति शर्तों के साथ कभी सन्यासी नहीं बन सकता और यह बात उन्होंने आनंद को बताई भी, लेकिन आनंद ने किसी भी बात को सुनने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी शर्त मानी जाएगी तभी वह सन्यासी बनेंगे। बुद्ध ने उनकी शर्त मान ली। उनकी शर्त यह थी कि वह हमेशा बुद्ध के साथ रहेंगे और उनका साया बनकर घूमेंगे। इसके बाद बुद्ध हमेशा आनंद के साथ रहे। यहां तक कि उनकी पत्नी यशोदा से मिलने भी वह उनके साथ गए।

लेकिन जब बुद्ध मृत्य शैय्या पर लेटे थे तब आनंद को उस कुटिया में नहीं आने दिया क्योंकि उसमे केवल सन्यासी ही जा सकते थे। आनंद उस कुटिया के बाहर बहुत रोये लेकिन वह जीवन में कभी सन्यासी बन ही नहीं सके थे। गौतम बुद्ध ने इस पर कहा कि अगर आप किसी चीज़ का स्वाद लेना चाहते हैं तो चम्मच से नहीं ले सकते, उसके लिए आपको उसे जुबान से चखना होगा। वैसे ही शर्तों को बीच में लाकर किसी भी किसी भी चीज़ का असली स्वाद नहीं लिया जा सकता। 

गौतम बुद्ध और भगवान के आस्तित्व की कहानी (Gautam Buddha and the Story Of God) 

Gautam Buddha and the Story Of God: गौतम बुद्ध के समय में राम का एक बहुत बड़ा भक्त हुआ करता था। उसने अपना पूरा जीवन राम का नाम लेते हुए और उनके मंदिर बनाते हुए बिताया था। हालांकि इसके लिए उसने जहां तक हो सका हर तरह के मोह इत्यादि से बचने की कोशिश भी की और खुद को इन सबसे दूर भी रखा लेकिन अपने अंतिम सालों में उसके मन में एक सवाल आया कि क्या भगवान सच में होते हैं। इस सवाल ने उसकी रातों की नींद उड़ा दी। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर इसका जवाब क्या है। उसने बहुत सोचा पर उसे जवाब नहीं मिला। 

Gautam Buddha Story photo
Gautam Buddha Story

एक दिन उसे पता चला कि उसके शहर में गौतम बुद्ध आए हैं। वह सुबह उठते ही उनके पास गया। बुद्ध उस समय स्नान कर रहे थे। उसने बुद्ध जो जाकर बताया कि मैंने भगवान का नाम लेने के लिए जीवन में काफी कुछ छोड़ दिया, पर अब जब अंतिम समय आ चुका है तब यह जानना चाहता हूं कि क्या भगवान होते हैं? मैंने जिसके लिए इतना त्याग किया, क्या पता वह मुझे जीवन के बाद मिले ही ना। उसने बुद्ध से पूछा कि क्या भगवान होते हैं और बुद्ध ने सीधा जवाब दिया।

नहीं। 

बुद्ध के सारे अनुयायी हैरान थे क्योंकि यह सवाल वह अक्सर उनसे पूछते रहते थे और बुद्ध ने कभी इसका जवाब नहीं दिया था। यह पहली बार था जब उन्होंने सीधे शब्दों में जवाब दिया था। 

उसी शाम एक और घटना घटी। उस समय गांवों, शहरों में चार्वाक नाम के व्यक्ति हुआ करते थे। यह व्यक्ति लोगों को यह यकीन दिलाते थे कि भगवान का आस्तित्व नहीं होता। जिंदगी भर भगवान का विश्वास करने वाले लोग, चार्वाक से 10 मिनट बात करके यकीन कर लेते थे कि भगवान का आस्तित्व नहीं है। उस शाम वह चार्वाक, गौतम बुद्ध से मिलने आया। उसे शक था कि वह लोगों को यकीन तो दिला रहा है कि भगवान नहीं होते, लेकिन अगर भगवान होते होंगे तो उसे मृत्यु के बाद अकेला छोड़ देंगे। वह गौतम बुद्ध के पास आया और उनसे पूछा कि क्या भगवान होते हैं। यह बुद्ध के शाम के स्नान का समय था। बुद्ध ने चार्वाक को साफ शब्दों में कह दिया कि

हां होते हैं भगवान।

बुद्ध के अनुयायी यह देखकर हैरान थे। सुबह के समय नहीं और अभी के समय हाँ। इस पर बुद्ध ने स्नान के बाद बताया कि अक्सर हमारे सवालों का जवाब हमारे अंदर ही छिपा होता है। अगर किसी के आस्तित्व से विश्वास डिग जाए तो वह कैसे हो सकता है? और अगर किसी के आस्तित्व पर विश्वास होने लगे तो वह कैसे नहीं हो सकता? ईश्वर हैं या नहीं इसका सवाल आपके विश्वास में छुपा हुआ है। 

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