गौतम बुद्ध का जीवन परिचय (Gautam Buddha ‘s Life: Rise of Buddhism)

Buddha Purnima
Mahatma Buddha ki Kahani

Buddha Purnima 2021 (Birthday of Gautam Buddha): 26 May, 2021

दुनिया में जब बहुत सारे लोगों की उम्मीदें टूटने लगती हैं तब वो प्रेरणा के लिए बुद्ध की तरफ देखते हैं। बुद्ध की उत्पति बुद्धि शब्द से हुई है और यह शब्द एक ऐसे इंसान की तरफ इशारा करता है, जिसकी बुद्धि सच में काम कर रही हो। बुद्ध को अपने ज्ञान के लिए याद किया जाता है। दुनिया उन्हें उनकी बातों, प्रेरणाओं और कथनों (Gautam Buddha Quotes) के लिए याद करती है। उनके जन्म दिन को बुद्ध पूर्णिमा (Buddh Purnima 2021) के रूप मे जाना जाता है। आज जानते हैं बुद्ध के जीवन की सभी बातेँ और उनके जीवन के जुड़े सभी पहलू। 

गौतम बुद्ध का शुरुआती जीवन (Early Life Of Gautam Buddha) 

गौतम बुद्ध के बहुत सारी कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन जो सबसे ज्यादा सुनी और कही जाने वाली कहानी है, वह यह है कि वह शाक्य साम्राज्य के राजकुमार थे। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। राजकुमार सिद्धार्थ की माता का देहांत उन्हें जन्म देने के सात दिन बाद ही हो गया था। 

एक बार शाक्य महाराज के यहां एक पुजारी आए और उन्हें सिद्धार्थ का हाथ दिखाया गया। उस पुजारी ने यह भविष्यवाणी की या तो यह राजकुमार एक महान राजा बनेंगे या फिर वह एक महान संत बनेंगे। 

शाक्य के महाराज सिद्धार्थ से बहुत प्रेम करते थे और चाहते थे उनके बेटे को बाहर की दुनिया के दुखों की किसी भी प्रकार से भनक ना लगे। उन्होंने अपने पुत्र को महलों में बड़ा किया और धर्म, इंसानियत और इंसानों के दुख के बारे में कुछ भी पता नहीं चलने दिया। 

मान्यताओं के अनुसार 16 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी। और इस दौरान भी वह महल में ही थे। और अगले 13 सालों तक उन्हें महल के बाहर की दुनिया के बारे में जानने का मौका नहीं मिला। 

असली दुनिया का आभास (Gautam Buddha’s Realisation of Real World) 

राजकुमार सिध्दार्थ अपने जीवन के तकरीबन 29 सालों तक महल के बाहर नहीं निकले लेकिन एक दिन संयोगवश वह अपने रथ पर बाहर निकल ही गए। उन्होंने पहली बार एक बूढे व्यक्ति को देखा और अपने सारथी से पूछा कि यह बुढ़ा क्यों है? तब उनके सारथी ने बताया कि यह प्रकृति का नियम है कि दुनिया का हर इंसान बुढ़ा होता ही है। 

आगे उन्होंने एक बीमार इंसान को देखा जो कि लाचार था। उसे देखकर राजकुमार सिद्धार्थ के सारथी ने बताया कि दुनिया के लोग बीमार पड़ते ही हैं। यह एक सामान्य बात है। आगे चलकर सिद्धार्थ ने लोगों को फसलों के लिए रोते हुए देखा। गरीबी की लाचारी देखी। इस दौरान उन्हें समझ आया कि आखिर असली दुनिया होती कैसी है? 

Gautam Buddha Nirvana
Buddhism’s Concept of Nirvana

शाक्य साम्राज्य छोड़ना (Left Shakya Kingdom) 

इंसानों के सभी दुखों को देखने के बाद राजकुमार सिद्धार्थ को यह समझ आ गया है कि जो दुनिया उन्हें महल के अंदर नजर आ रही है, वह असली दुनिया नहीं है। उन्होंने 29 साल की उम्र में आधी रात को अपना महल छोड़ दिया। वह दुनिया को और उसके दुखों को और भी बारीकी से जानना चाहते थे। 

ज्ञान की तलाश (Pre-Realisation time of Buddha) 

अपना महल इत्यादि छोड़ने के बाद बुद्ध ने अगले 6 साल ज्ञान की तलाश में बिताए। वह संतों सा जीवन बीता रहे थे। गुरुओं से मिल रहे थे, पढ़ रहे थे और खुद की तलाश कर रहे थे। 

उन्होंने इस तलाश को 5 संतों के साथ शुरू किया और सिद्धार्थ का प्रभाव ऐसा था कि वो सभी 5 संत उनके शिष्य बन गए। हालांकि जब उनके सवालों का जवाब नहीं मिला तब उन्होंने और मेहनत की दाना पानी छोड़कर उपवास किए, जंगल दर जंगल भटककर दर्द को सहा, लेकिन उन्हें उनके सवालों के जवाब नहीं मिले। 

उन्होंने बहुत प्रयास किए लेकिन वहाँ तक नहीं पहुंच सके, जहां तक वह पहुंचना चाहते थे। एक दिन उन्हें एक बच्ची ने चावल से भरा कटोरा भिक्षा के रूप में दिया। उन्हें लगा कि यह तरीके अपनाकर तो वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं इसलिए उन्होंने वह चावल खा लिए। नहाए और पानी भी पिया। यह देखकर उनके अनुयायी बन चुके पांच संतों को लगा कि शायद सिद्धार्थ अब अपने सवालों से मुँह मोड़ चुके हैं और उन्होंने, सिद्धार्थ को छोड़ दिया। 

ज्ञान की प्राप्ति (Self Realisation under Bodhi Tree) 

उनके अनुयायियों के छोड़ जाने के बाद सिद्धार्थ अकेले बोधि पेड़ के नीचे बैठे और खुद से सवाल करने शुरू किए। जिन सवालों के जवाब वो बाहर ढूंढ रहे थे, वही सवाल उन्होंने खुद से पूछने शुरू कर दिए। वह वहाँ पर कई दिनों तक साधना में लीन रहे। उन्होंने अपने पूरे जीवन पर विमर्श किया और वह इतने सक्षम हो गए कि वह अपने पिछले जीवन को भी देख पा रहे थे।

इस ज्ञान की प्राप्ति (Self Realisation) के दौरान उन्हें मारा नाम एक राक्षस की चुनौती स्वीकर करनी पड़ी जो कि सिध्दार्थ को लगातार चुनौती दे रहा था और बुद्ध बनने से रोकना चाहता था। जब मारा ने उनके ज्ञान को अपने ज्ञान के तौर पर हड़पने की कोशिश की तब सिद्धार्थ ने पृथ्वी से प्रार्थना की, कि वह उनकी ज्ञान प्राप्ति की गवाह बनें और ऐसा ही हुआ और सिद्धार्थ गौतम अंततः गौतम बुद्ध बन गए। इस दौरान उन्हें इस दुनिया की उत्पति और ब्रह्मांड के सभी रहस्य, सब कुछ मालूम हुए। 

बुद्ध और घोंघे की कहानी(Story Of Snails – Gautam Buddha) 

दोस्तों आपने जब भी बुद्ध की कोई तस्वीर या मूर्ति देखी होगी तो यह देखा होगा कि बुद्ध के सर पर ब्लाक जैसा कुछ बना हुआ है। यह और कुछ नहीं घोंघे हैं जो कि उनके सिर पर इस दौरन आकर बैठ गए थे ताकि उन्हें किसी भी आपदा से बचा सकें। 

बुद्ध की सीखें (Gautam Buddha Teachings) 

Buddha photo quotes teachings
Gautama Buddha Quotes

बोधि पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति के बाद बुद्ध ने तय किया कि उस ज्ञान को वह किसी और को नहीं देंगे, क्योंकि उन्होंने जो जाना था, जो देखा था वह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता था, हालांकि देवों के देव ब्रह्मा ने बुद्ध से कहा कि वह दुनिया को अपने ज्ञान से प्रेरित करें। 

बुद्ध जब ज्ञान देने निकले तब उन्हें 100 मील की दूरी पर वह 5 संत मिल गए जो कि पहले उनके अनुयायी हुआ करते थे। बुद्ध ने उन्हें कहा कि एक ऐसे रास्ते पर चलो जो कि मध्यमार्ग हो और जीवन में लगभग हर चीज़ का संतुलन जरूरी है। 

बुद्ध ने सारनाथ ने अपना पहला उपदेश दिया। वहाँ उन्होंने धर्म के पहिये के बारे में बताया और चार सच के बारे में बताया जो कि आगे चलकर बौद्ध (Buddhism) के चार महत्त्वपूर्ण स्तंभ बने। 

बुद्ध के चार आर्य सत्य (4 Noble Truths Of Buddha) 

  • बुद्ध का पहला सच यह था कि इंसानों का आस्तित्व दुखों से भरा हुआ है। उदाहरण के तौर पर आप दुनिया के अमीर से अमीर इंसान को देख लीजिए, खूबसूरत से खूबसूरत इंसान को देख लीजिए, या हर उस इंसान को देख लीजिए जिसके पास आपको लगता है कि वह सब कुछ है जो आपके पास होना चाहिए। आप यहीं पाएंगे कि सभी दुखी हैं। 
  • बुद्ध का दूसरा सच यह था कि दुखों की असली वजह है इच्छाएं। आप शहर के सबसे अमीर व्यक्ति बनते हैं, तब आपको राज्य का सबसे अमीर व्यक्ति बनना है। बन गए तो देश का लक्ष्य रखेंगे, नहीं बने तो दुख। स्कुल टॉप करने वाले, कॉलेज टॉप करना चाहते हैं, करते हैं तो खुशी की बजाय बड़ा लक्ष्य रखते हैं, नहीं कर पाने पर दुखी होते हैं। 
  • बुद्ध का तीसरा सच यह था कि दुखों का अंत इच्छाओं के अंत से आता है। अपनी इच्छाओं को खत्म कर लीजिए, आपके दुख खत्म हो जाएंगे। 
  • बुद्ध का चौथा सच यह था कि दुखों की दुनिया से निकलने के लिए आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलें। 

आर्य अष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path) 

Golden buddha photo
Gautama Budh photo

आर्य अष्टांगिक मार्गों के बारे में बुद्ध ने बताया है कि यह जीवन को सुधारने के आठ कदम हैं। 

  • सम्यक दृष्टि – सम्यक दृष्टि का मतलब है कि व्यक्ति को चार आर्य सत्यों में विश्वास करना चाहिए। 
  • सम्यक संकल्प – यह प्रतिज्ञा लें कि आप अपना नैतिक और मानसिक विकास करेंगे, क्षय नहीं। 
  • सम्यक वाक – ऐसी बातेँ जिससे किसी को दुख या नुकसान पहुंचता है ना बोलें, झूठ ना बोलें। 
  • सम्यक कर्म – ऐसे काम जिससे किसी को दुख या नुकसान ना पहुंचे, मत कीजिए। 
  • सम्यक जीविका – किसी को नुकसान पहुंचे ऐसा कोई व्यापार मत करिए। 
  • सम्यक प्रयास – आपने आप को हमेशा बेहतर बनाने की कोशिश करिए। 
  • सम्यक स्मृति – सब कुछ तर्क के साथ देखने की मानसिक शक्ति का विकास करिए। 
  • सम्यक समाधि – उपरोक्त सभी करने के बाद आप अपने अंदर बदलाव पाएंगे जो कि आपको सम्यक समाधि की ओर ले जाएगी। 

गौतम बुद्ध की मृत्यु (Death Of Gautam Buddha) 

कहा जाता है कि खराब खाने के कारण गौतम बुद्ध की मृत्यु हुई थी। मृत्यु के समय उनकी उम्र 80 साल थी। उन्होंने अपनी मृत्यु के समय अपने अनुयायियों से कहा था कि किसी भी और को फॉलो ना करें बल्कि अपने ज्ञान का प्रकाश खुद बनें, यानी कि, 

“अपनी समस्याओं का समाधान अपने अंदर ढूंढे, खुद से सवाल करें”

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