याराना है क्या – ग़ज़ल – Gazal – Kavi Agyat

कवि अज्ञात (Kavi Agyat) की नई ग़ज़ल।

सच और झूठ का फ़साना है क्या?

तुम्हारा और मेरा याराना है क्या?

जब चली गई थीं तुम, मजलिस के उस पार,

मेरे दिल ने पूछा था, “बता मर जाना है क्या?”

पल में खफा, पल में वफा, पल में दफा होता है,

दुनिया में ऐसा कोई, दीवाना है क्या? 

अब जब भी तुम्हें देखता हूं, सोचता यही हूं, 

तू सोच ले, इसी से दिल लगाना है क्या? 

मोहब्बत हो खत्म और मैं आंखें बंद कर लूं, 

उस दिल के सिवा, मेरा कहीं ठिकाना है क्या?

लेखक :- कवि अज्ञात (Kavi Agyat)

Sach Aur Jhuth Ka Fasana Hai Kya? 

Tumhara Aur Mera Yaarana Hai Kya? 

Jab Chali Gai Thi Tum, Majlis Ke Us Paar, 

Mere Dil Ne Pucha Tha, “Bata Mar Jana Hai Kya?” 

Pal Me Khafa, Pal Me Wafa, Pal Me Dafa Hota Hai, 

Duniya Mein Aisa Koi, Deewana Hai Kya? 

Ab Jab Bhi Tumhe Dekhta Hoon, Sochta Yahi Hoon, 

Tu Soch Le, Isi Se Dil Lagana Hai Kya? 

Mohabbat Ko Khatm Aur Main Aankhe Band Kar Loon, 

Us Dil Ke Siwa, Mera Kahin Thikana Hai Kya?

लेखक :- कवि अज्ञात (Kavi Agyat)

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