Jayant Chaudhary: Biography, Facts, Family, Politics

Jayant Chaudhary life facts: (जयंत चौधरी से जुड़े दिलचस्प तथ्य)

Jayant Chaudhary
Jayant Chaudhary :  Former MP
नाम (Name):  जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) 
जन्मतिथि (Birthday): 27 दिसंबर, 1978 (27 December, 1978) 
उम्र (Age): 43 साल (जनवरी 2022 में) 
पेशा (Profession):राजनेता ( Politician) 
पसंदीदा नेतृत्वकर्ता (Favorite leader):चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) 
पर्सनल लाइफ (Personal Life) : 
जन्मस्थान (Birthplace):डलास टेक्सास, अमेरिका (Dallas, Texas U.S.) 
राष्ट्रीयता (Nationality):भारतीय (Indian) 
धर्म (Religion):हिंदू (Hindu) 
जाति (Caste):जाट (Jaat) 
हाईट (Height): 1.72 मीटर ( 5’6″ फीट में) 
कॉलेज (College) :लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस, यू. के. (London school of economics and political science, U.K.) 
शिक्षा (Education):अकाउंट और फाइनेंस से एम. एस. सी. (M.Sc. {Account and Finance})  
हॉबी (Hobbies):आर्ट और म्यूजिक सुनना (Art and listening to music) 
रिलेशनशिप और परिवार (Relationship And Family) – 
वैवाहिक स्थिति (Marital Status): विवाहित (Married) 
पत्नी (Wife) :चारु सिंह (Charu Singh) 
पिता (father) :चौधरी अजीत सिंह (Chaudhary Ajit Singh) 
माँ (Mother) :राधिका सिंह (Radhika Singh) 
दादा जी (Grandfather):चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) 
संतान (Children):दो पुत्रियाँ (Two Daughters) 
कुल कमाई (Net Worth) : 10.74 करोड़ (2019 में उपलब्ध डाटा अनुसार) 
राजनीतिक कैरियर (Political Career)- 
चुनाव क्षेत्र (Constituency): मथुरा (Mathura) 
राजनीतिक पार्टी (Political Party):राष्ट्रीय लोक दल (Rashtriya Lok Dal) 
पद (Position Held):2009 में पंद्रहवीं लोकसभा में चुने गए। कृषि समिति के सदस्य एवं 
कार्यकाल (Tenure):   2009 से 2014 तक 

Jayant chaudhri: Early Life, Family And Political Career (जयंत चौधरी: शुरुआती जीवन, परिवार और राजनीतिक करियर)

एक राजनैतिक (political) परिवार में जन्में जयंत की रुचि पॉलिटिक्स (politics) में होना स्वभाविक सी ही बात थी। वैसे तो जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) का जन्म डलास टेक्सास (Dallas Texas) में हुआ था। उनके पिता का नाम अजीत सिंह तथा उनकी माता का नाम राधिका सिंह है। 

Jayant Chaudhary with Akhilesh Yadav

जिस समय जयंत का जन्म हुआ था, तब उनके पिता अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर जॉब करते थे। उनके दादा जी श्री चौधरी चरण सिंह भारत में राजनेता के रूप में सक्रिय थे। केंद्र की राजनीति में चौधरी चरण सिंह का सिक्का चलता था। डलास टेक्सास (Dallas Texas) में जयंत के जन्म का उत्सव भारत में दिल्ली में स्थित बारह तुगलक रोड पर चौधरी चरण सिंह की मौजूदगी में मनाया गया था। देखा जाए, तो राजनीतिक गलियारों में जयंत के जन्म के उपलक्ष्य में मनाई गयी इस party को सबसे मशहूर पार्टियों में से एक माना जाता है। यहाँ इंदिरा गांधी समेत कई दिग्गज नेता इस पार्टी में मौजूद थे। जयंत का जन्म 1978 में हुआ था और 1979 में ही उनके दादा चौधरी चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद संभाला, हालांकि इंदिरा के समर्थन वापस लेने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। राजनीतिक परिस्थितियाँ अब दिशा बदल रही थी। चौधरी साहब के बेटे और जयंत के पिता चौधरी अजीत सिंह आई. आई. टी. खड़गपुर (IIT Kharagpur) से पढ़े थे और उस समय अमेरिका में नौकरी कर रहे थे। आपको जानकर हैरानी होगी, पर चौधरी अजीत सिंह उस समय आईबीएम (IBM) में काम करने वाले गिने-चुने भारतीयों में से एक थे। लेकिन जैसे ही राजनीति का पासा पलटा और उन्हें लगने लगा कि अब वो दिग्गज नेताओं के सामने अकेले नहीं टिक पायेंगे और उन्हें अपने बेटे के साथ की जरूरत है तो उन्होंने अजीत सिंह को अमेरिका से भारत बुला लिया। इसके बाद चौधरी अजीत सिंह ने चौधरी चरण सिंह की विरासत को संभाला। उसके बाद अजीत भी भारत में राजनेता के तौर पर उभरे, उन्होंने अपनी खुद की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल (RLD) का गठन किया। और बाद में जयंत ने इस पार्टी की कमान संभाली। चूंकि जयंत ने बचपन से ही घर में राजनीतिक गतिविधियां देखी थीं, ऐसे में राजनीति में उनका रुझान तय ही था। 2009 के लोकसभा चुनाव में जयंत पहली बार चुनाव लड़े थे। हालांकि इससे पहले कई बार वे प्रचार में जरूर शामिल रहे हैं। कोरोना काल में पिता अजीत सिंह की मृत्यु के बाद जयंत ने राष्ट्रीय लोक दल पार्टी की कमान संभाली। वर्तमान में जयंत राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष हैं। 

Jayant Chaudhary’s Early life- (शुरुआती जीवन)

जयंत का राजनीति में आना लगभग तय ही था क्योंकि उनके दादा चौधरी चरण सिंह राजनीति में थे। उनके दादा चौधरी चरण सिंह भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री भी रहे थे। हालांकि प्रधानमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा था। वे 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक ही भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे। चौधरी साहब की पहचान एक किसान नेता के रूप में रही। उन्होंने किसानों के जीवन और उनकी परिस्थितियों को बेहतर करने के लिए कई नीतियों को शुरू किया था। चौधरी साहब का मुख्यमंत्री काल भले ही छोटा रहा हो पर इस दौरान अपने द्वारा लिए गए फैसलों से उन्होंने देश में राजनेता के रूप में एक अलग ही छाप छोड़ी थी। किसानों के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को आप इसी बात से समझ सकते हैं कि उनके जन्मदिन के अवसर पर 23 दिसंबर को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। दिल्ली में यमुना के किनारे उनकी समाधि है जिसे किसान घाट के नाम से जाना जाता है। 

जयंत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज (Sri Venkateswara College) से अंडरग्रेजुएट किया है इसके बाद जयंत ने 2002 में लंदन के लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (London School Of Economics And Political Science) से Master of finance की degree ली है। जयंत ने लगभग दो सालों तक दिल्ली में एक investment bank में भी job की है. जयंत एक राजनेता होने के साथ साथ अर्थव्यवस्था और banking की भी अच्छी समझ रखते हैं। उन्होंने 1996 में एक उपचुनाव से प्रचार में जाना शुरू किया इसके बाद 2002 के विधानसभा चुनावों से उन्होंने सही अंदाज में चुनाव प्रचार शुरू किया। 2004 के लोकसभा चुनाव तक जयंत एक सक्रिय नेता बन गए थे।  और 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा। 

राजनीतिक कैरियर (Jayant Chaudhary Political Career)-

जयंत ने अपने राजनीतिक कॅरिअर की शुरुआत मथुरा सांसद सदस्य के रूप में की थी। आपको बता दें कि मथुरा में जाट लोगों की बहुलता है और जंयत भी जाट परिवार से ही आते हैं। जयंत भूमि अधिग्रहण के मुद्दे (Land Acquisition issue) पर प्रमुख प्रस्तावकों में से एक थे। इसके अलावा उन्होंने लोकसभा में भूमि अधिग्रहण पर एक निजी सदस्य विधेयक भी पेश किया था। जयंत सिंह चौधरी वाणिज्य पर स्थायी समिति, वित्त पर सलाहकार समिति, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), और सरकारी आश्वासनों की समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने पहले कृषि और वित्त पर स्थायी समितियों के साथ-साथ आचार समिति में भी काम किया है। 2014 के भारतीय आम चुनावों में जयंत मथुरा से चुनाव लड़ रहे थे लेकिन इस बार उनकी विरोधी भाजपा उम्मीदवार हेमा मालिनी ने उन्हें हराकर सीट (seat) पर कब्जा कर लिया। 

राजनीतिक घटनाक्रम (Political Events)

2009: 

2009 में जयंत चौधरी मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से 15 वीं लोकसभा के लिए चुने गए थे, जहाँ उन्होंने भाजपा के श्याम सुंदर शर्मा को डेढ़ लाख मतों के अंतर से हराया था।

2009:

इसके बाद 2009 में ही उन्हें कृषि संबंधी समिति और नैतिकता संबंधी समिति के सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया।

2014:

2014 में जयंत मथुरा सीट से चुनाव लड़े थे लेकिन इस बार उनका सामना हेमा मालिनी से था, वह भारतीय जनता पार्टी की ओर से मथुरा सीट के लिए चुनाव लड़ रही थी। हेमा मालिनी के सामने मथुरा में जयंत का जादू नहीं चल सका और जयंत तीन लाख से भी अधिक वोटों के अंतर से हार गए।

2019:

इसके बाद जयंत 2019 में भी बागपत से चुनाव लड़े थे लेकिन 2019 में भी भारतीय जनता पार्टी के डा. सत्यपाल सिंह के सामने जयंत का सिक्का ना चल सका। और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। डा. सत्यपाल सिंह ने उन्हें करीब 23,500 वोटों से हराया। 

जयंत चौधरी का परिवार (Jayant Chaudhary Family) –

Jayant Chaudhary family

जयंत चौधरी के दादा जी चौधरी चरण सिंह पूर्व प्रधानमंत्री थे। और उनके पिता चौधरी अजीत सिंह थे। जयंत चौधरी का विवाह 2003 में चारु चौधरी से हुआ और उनकी दो बेटियाँ हैं। उनकी एक बेटी का नाम साहिरा (Sahira) और उनकी दूसरी बेटी का नाम एलिसा (Elisa) है।

हालांकि जयंत अपनी पर्सनल लाइफ (personal life) को काफी निजी रखना पसंद करते हैं और इसीलिए वे अपने सोशल मीडिया हैंडल (social media handles) पर भी अपने परिवार से जुड़ी कम ही जानकारी साझा करते हैं। 

जयंत के बारे में कुछ रोचक तथ्य (Interesting Facts about Jayant Chaudhary)-

  1. अप्रैल 2019 में अपनी रैलियों के दौरान जब भारत के प्रधानमंत्री ने सपा, राष्ट्रीय लोकदल और बहुजन समाज पार्टी से शुरू के अक्षरों से मिलाकर इनके गठबंधन के लिए ‘सरब’ शब्द का प्रयोग किया था। वैसे अंग्रेजी में सरब का मतलब मृगतृष्णा होता है। और इसके जवाब में जयंत ने बीजेपी को बहुत जुतिया पार्टी कहा था, जिसके बाद वे विवादों में आ गए थे।
  2. 2022 के लोकसभा चुनावों में जयंत समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरने वाले हैं
  3. चुनाव के कुछ दिन बचे हैं और जयंत अपने नाम में परिवर्तन को लेकर फिर से चर्चा में हैं। दरअसल जयंत पहले जयंत सिंह चौधरी लिखते थे पर अब उन्होंने अपना नाम चुनाव के कुछ दिन पहले ‘चौधरी जयंत सिंह’ कर लिया है। इस पर जब मिडिया ने जयंत से सवाल पूछा, तो जयंत ने कहा पिता की मृत्यु के बाद गाँव के बड़े बुजुर्गों ने उनसे ऐसा करने को कहा। 

दोस्तों वैसे तो जयंत (Jayant Chaudhary) के किस्से अभी कम ही हैं। लेकिन कोरोना काल में अपने पिता चौधरी अजीत सिंह की मृत्यु के बाद अपने बाप-दादा की डूबती पार्टी को बचाने का दारोमदार अब जयंत पर ही है। देखते हैं समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव के साथ, उनकी ये दोस्ती और उनका नया नाम जयंत के लिए कितना लाभदायक होता है। 

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