Lala Lajpat Rai Biography: Facts, Achievements, Family, Slogans in Hindi

Lala Lajpat Rai “The Lion Of Punjab” भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन में लाला लाजपत राय का योगदान अतुलनीय है। लाला जी को पंजाब केसरी और पंजाब के शेर के नाम से भी जाना जाता था। लाला जी की मृत्य, लाहौर में साइमन कमिशन का विरोध करते समय हुई थी। वह एक अहिंसक जत्थे के साथ प्रदर्शन कर रहे थे और तभी पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कोट द्वारा लाठी चार्ज का आदेश दिया गया और लाला जी को इस दौरान गंभीर चोटें आईं और वह मृत्यु को प्राप्त हो गए। लाला जी की मृत्यु आज से 92 साल पहले, 17 नवंबर 1928 को हुई थी।

Lala Lajpat Rai Memorial

लाला लाजपत राय की जीवनी Biography Of Lala Lajpat Rai

शुरुआती जीवन (Early Life) 

लाला जी का जन्म दूधीके में साल 1865 में 28 जनवरी को, एक पंजाबी हिन्दू परिवार में हुआ था। लाला जी के पिता मुन्शी राधे कृष्ण (Munshi Radhe Krishn) उर्दू और पारसी के सरकारी अध्यापक थे। लाला जी की माता का नाम गुलाब देवी (Gulab Devi) था। 

लाला जी जब पांच साल के हुए तभी उनके पिता जी का ट्रांसफर रेवाड़ी में कर दिया गया। तब के समय में रेवाड़ी हरियाणा में ना होकर, पंजाब प्रांत में हुआ करता था। लाला जी ने अपनी बारहवीं तक कि पढ़ाई इसी दौरान की थी। लाला जी के माता और पिता का सनातन धर्म में बहुत विश्वास था और उनकी आस्था के कारण ही लाला जी भी काफी धार्मिक थे। उनके उनके लिबरल और धार्मिक विचार अपने माता और पिता से मिले थे जिसका प्रयोग उन्होंने आगे चलकर राजनीति और पत्रकारिता में किया और दोनों के जरिए बुराई पर जमकर वार किया। साल 1880 में 15 साल की उम्र में लाला जी लाहौर चले आए जहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की। वहीँ से वह पंडित गुरु दत्त और लाला हंस राज के संपर्क मे आए और उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए लड़ने का मन बनाया। 

राजनीति में लाला जी (Lala Lajpat Rai Political Carrer) 

लाला जी बचपन से ही मातृभूमि के लिए कुछ करना चाहते थे और उसका तरीका उन्हें लाहौर में कानून की पढ़ाई के दौरान मिला। वहाँ उन्हें लाला हंस राज और पंडित गुरु दत्त जैसे साथी मिले। लाहौर में ही लाला जी ने स्वामी दयानन्द सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) के आर्य समाज भी दाखिला ले लिया था। लाला जी एक ही वक़्त पर नौजवान भारत सभा और हिन्दू महासभा के भी सदस्य थे और हिन्दू महासभा का सदस्य होने के नाते उन्हें नौजवान भारत सभा से आलोचना भी झेलनी पड़ती थी, क्योंकि हिन्दू महासभा सेक्युलर नहीं थी और नौजवान भारत सभा और भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस, भारत को एक सेक्युलर देश के रूप में आजादी दिलवाना चाहते थे। हालांकि लाला जी बीच की ही सोच रहे थे, उनके अनुसार हिन्दू मान्यताओं के आधार पर चलकर सेक्युलर रास्ता पाया जा सकता है, क्योंकि हिन्दू धर्म का आधार ही वसुधैव कुटुम्बकम जैसे मंत्र पर है। 

बार काउंसिल की स्थापना (Bar Council Establishment) 

लाहौर से वकालत करने के बाद लाला जी हिसार लौट आए। उस वक़्त उनके पिता का ट्रांसफर रेवाड़ी से रोहतक कर दिया गया था। हिसार में लाला जी (Lala Lajpat Rai) ने वकालत की प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। यहां उन्होंने बार काउंसिल हिसार की भी स्थापना की। उसी साल उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस की हिसार शाखा की भी स्थापना की। उन्होंने आगे चलकर उस शाखा से कॉंग्रेस का 1889 का इलाहाबाद अधिवेशन भी अटेंड करने का भी मौका मिला। 1892 में वह फिर लाहौर लौट गए जहां लाहौर हाई कोर्ट में वह प्रैक्टिस करते रहे। इसके साथ ही वह पत्रकारिता भी करते थे और कई सारे अखबारों के लिए लिखा करते थे। 

अमेरीका में लाला जी (Lala Lajpat Rai In America)

लाला जी ने 1914 में कानून की प्रैक्टिस छोड़ दी और ब्रिटेन चले गए। ऐसा उन्होंने भारत की गुलामी के कारणों को समझने के लिए किया था। 3 सालों तक ब्रिटेन में रहने के बाद, लाला जी 1917 में अमेरीका चले गए। 1917 में लाला जी ने अमेरीका में इंडियन होम रूल लीग की स्थापना की। 1920 तक लाला जी अमेरीका में रहे और उसके बाद भारत की आज़ादी में योगदान देने भारत चले आए। 

आजादी की लड़ाई में लाला जी (Lala Lajpat Rai In Freedom Fight) 

अपनी वक़ालत के दिनों से ही लाला लाजपत राय, भारत के लिए कुछ करना चाहते थे। इसीलिए वह इन्डियन नेशनल कांग्रेस, हिन्दू महासभा और नौजवान भारत सभा जैसे संगठनों से जुड़े रहे। साल 1920 तक, जब तक लाला जी भारत लौटे तब तक कांग्रेस एक बड़ा आंदोलन बन चुकी थी। अमेरीका में लौटने के बाद से लाला लाजपत राय कांग्रेस के साथ अपनी मृत्यु तक एक्टिव रहे।

मृत्यु (Death) 

लाला लाजपत राय काँग्रेस से आजादी की लड़ाई में जुड़े रहे और 35 साल पुराने नेता होने के कारण उनका कद पार्टी और आंदोलन ने बहुत बड़ा था। वह तत्कालीन पश्चिमी भारत में गांधी जी से भी ज्यादा प्रसिद्ध थे। साल 1928 में लॉर्ड साइमन को भारत में राजनीतिक परिस्थितियों पर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। सर जॉन साइमन, जो कि बाद में लॉर्ड साइमन के नाम से जाने गए, ने रिपोर्ट तैयार कर ली, लेकिन साइमन द्वारा बनाई गई यह रिपोर्ट, कांग्रेस को पसंद नहीं थी, क्योंकि यह भारत के बारे में थी और इसे बनाने वाली समिति में एक भी भारतीय नहीं था। 17 नवंबर, 1928 को लाला लाजपत राय इसी रिपोर्ट का विरोध करने लाहौर पहुंचे और उनके साथ मौजूद जत्थे ने, अहिंसक रूप से साइमन गो बैक के नारे लगाकर विद्रोह किया। यह भीड़ अहिंसक थी लेकिन अंग्रेजों को विद्रोह का यह रवैय्या पसंद नहीं आया और वहाँ के पुलिस अधीक्षक, जेम्स ए. स्कोट ने लाठी चार्ज का आदेश दे दिया और इसी लाठी चार्ज के दौरान लाला जी को गंभीर चोटें आईं। इन चोटों के बाद जब लाला जी को अस्पताल ले जाया गया तब वहाँ पता चला कि लाला जी मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं।

भगत सिंह पर प्रभाव (Bhagat Singh after Lala Lajpat Rai Death)

लाला लाजपत राय जी को जब अस्पताल ले जाया तब वह मृत्यु को प्राप्त हो गए। यह पूरे देश के लिए शोक का कारण था और पूरा देश शोकाकुल था। जब ब्रिटिश पार्लियामेंट में इस मुद्दे को उठाया गया तब वहाँ अधिकारियों द्वारा यह साफ मना कर दिया गया कि लाला जी की मृत्यु में उनका कोई हाथ नहीं था। यह केवल एक हादसा था। हालांकि भारतीय जानते थे कि यह एक हत्या है। भगत सिंह लाला जी से काफी प्रभावित थे और लाला जी के शहीद होने के बाद वह काफी शोकाकुल हो गए थे। उनके अनुसार यह केवल लाला जी की ही नहीं बल्कि पूरे आजादी के आंदोलन की हत्या थी और भगत सिंह ने यह ठान लिया था कि वह इस हत्या का बदला जरूर लेंगे। लाला जी की हत्या का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने लाहौर के पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कोट की हत्या करने की योजना बनाई। यह ब्रिटिश शासन को एक सीधा संदेश देने के लिए किया जा रहा था। इस योजना ने भगत सिंह के साथ अन्य क्रांतिकारी, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव थापर, शिवराम राजगुरु भी शामिल थे। हालांकि जिस दिन जेम्स को शूट करने के लिए भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारी लाहौर पहुंचे, उस दिन भगत सिंह से एक भारी गलती हो गई और उन्होंने पुलिस अधीक्षक की जगह उप पुलिस अधीक्षक को गोली मारने के लिए सिग्नल दे दिया। यह उप पुलिस अधीक्षक जॉन पी. सांडर्स (John P. Saunders) था। सांडर्स को भगत सिंह और राजगुरु ने लाहौर पुलिस हेडक्वॉर्टर के बाहर गोली मारी थी इसलिए वहां मौजूद पुलिस चौकन्नी हो गई थी। वहां मौजूद चनन सिंह ने क्रांतिकारियों की टोली का पीछा किया और अंत में आजाद की गोली से घायल होकर पीछे हटा। भगत सिंह और उनके बाकी साथियों पर इस मामले में केस हुआ और आगे चलकर इसी मामले में उन्हें फांसी भी दी गई। हालांकि इसी घटना को भारत की आज़ादी का एक टर्निंग पॉइंट् भी माना जाता है क्योंकि इसी घटना के बाद भारत का हर तबका ब्रितानी हुकूमत को उखाड़ने के लिए आंदोलन में भाग लेने लगा।

लाला लाजपत राय से जुड़े तथ्य Lala Lajpat Rai Unknown Facts

Fact #1 – Laal Baal Paal 

पंजाब के लाला लाजपत राय, महाराष्ट्र के बाल गंगाधर तिलक और बंगाल के विपिन चंद्र पाल को एक साथ लाल, बाल, पाल कहा जाता है। यह तीनों भारतीय राजनीति को सुधारने के लिए जाने जाते हैं। 

Fact #2 – Lala Lajpat Rai as Journalist 

लाला लाजपत राय ने अपने जीवन मे एक वकील और एक पत्रकार के तौर पर बखूबी काम किया। वह वकालत करने के साथ साथ लेख भी लिखा करते थे। उन्होंने मुख्य तौर पर आर्य गजट में काम किया था और वह उसके संस्थापक भी थे। 

Fact #3 – Lala Lajpat Rai Established PNB

पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना लाला लाजपत राय द्वारा 1894 में की गई थी। पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना में उनके साथ दयाल सिंह मजीठिया भी शामिल थे। 

Fact #4 – Lala Ji In Congress 

लाला जी ने साल 1981 में कांग्रेस जॉइन की थी। तब वह केवल 16 वर्ष के थे। वह काफी तेज बुद्धि के थे और उनके अंदर देश के लिए कुछ कर दिखाने की ललक थी।

लाला लाजपत राय के नारे Slogans and Quotes of Lala Lajpat Rai

#1 – हमे केवल अंग्रेजों से ही नहीं, बल्कि गरीबी, बीमारी, अज्ञानता, मानसिक गुलामी से भी आजादी चाहिए।

#2 – जीवन में अनुशासन सबसे जरूरी है, वह नहीं होगा तो तरक्की के रास्ते पर समस्या खड़ी हो जाएगी।

#3 – देशभक्ति की रचना, सत्य और न्याय के आधार पर ही की जा सकती है।

#4 – दूसरों पर विश्वास रखने की बजाय, स्वंय पर विश्वास करें। आप केवल और केवल अपने प्रयासों से सफल हो सकते हैं, क्योंकि राष्ट्रों का निर्माण अपने बलबूते पर ही किया जा सकता है।

Lala Lajpat Rai Quotes
Lala Lajpat Rai Quotes

#5 – अहिंसा केवल शस्त्र ना उठाने से नहीं होती, बल्कि उसके लिए अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और निष्ठा भी रखनी होती है।

Lala Lajpat Rai Quotes

#6 – नेता के अंदर निडरता और हिम्मत का गुण होना चाहिए। जिसका नेतृत्व प्रभाव पैदा करे, और जो अपने अनुयायियों से आगे हो, वह नेता है।

लाला लाजपत राय की लिखी किताबें Books Of Lala Lajpat Rai

लाला लाजपत राय, एक अच्छे वकील के साथ साथ एक अच्छे लेखक भी थे। वह विचारक थे और अपने विचारों को किताबों के जरिए संग्रहित करते थे। उन्होंने अपने जीवन में 8 किताबें लिखी थीं जो कि काफी ज्यादा पढ़ी भी गई। किताबों की सूची निम्न है।

1)भारत पर इंग्लैंड का कर्ज – England’s Debt To India 

2)नाखुश भारत – Unhappy India 

3)नौजवान भारत – Young India 

4)हमारी शैक्षिक समस्याएं – Our Educational Problems 

5)डेविड जॉर्जि लॉयड के नाम खुला पत्र : ग्रेट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री – An Open Letter to Honourable David Lloyd George : Prime Minister Of Great Britain 

6)भागवत गीता का संदेश – The Message Of Bhagwat Geeta 

7)छत्रपति शिवाजी – Chhatrapati Shivaji

8)योगीराज श्रीकृष्ण – Yogiraj Shrikrishna

सभी किताबों को एमाजॉन के जरिए प्राप्त किया जा सकता है।

लेखक :- अनंत कुमार विश्वकर्मा “कवि अज्ञात”

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