Mahatma Gandhi’s thoughts on sex, brahmacharya and women (सम्बंध, ब्रह्मचर्य और स्त्री के बारे में महात्मा गांधी के विचार)

Mahatma Gandhi's thoughts

Mahatma Gandhi’s thoughts on sex, Spirituality, Celibacy and Women (आध्यात्मिकता, स्त्री, ब्रह्मचर्य पर महात्मा गांधी के विचार)

इस बात मे कोई दोराय नहीं है कि महात्मा गांधी ने अपने पूरे जीवन और मृत्यु काल के दौरान अपने हजारों अनुयायी तो बनाये ही, साथ ही साथ उनके कई कार्यों की वज़ह से उन्हें लोगों द्वारा कड़ी आलोचना का सामना भी करना पड़ा. अपने जीवन काल में किए गए अभूतपूर्व और महान कार्यो की वजह से महात्मा गांधी के पूरे जीवन काल पर हमेशा से ही पूरी दुनिया की नजर बनी रही और उस पर कई लोगों द्वारा समीक्षा और गहन अध्ययन भी किया गया. 

हालांकि इस मामले मे महात्मा गांधी के ब्रह्मचर्य के साथ किए गए प्रयोग एक exception हैं. क्योंकि अक्सर गांधी के चरित्र और उनके कार्यों के जो लोग गुण गाते हैं, वही लोग गांधी के ब्रह्मचर्य से जुड़े विचारों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं. उनके ऐसा करने के पीछे यही वज़ह है कि ये बातें शायद महात्मा गांधी के महान कार्यों और अच्छी साख पर दाग लगा सकते हैं. गांधी एक ऐसे शख्स थे जिनका पूरा जीवन ही लोगों के लिए एक सीख है, और ना ही उन्होंने कभी खुद को ऐसी आलोचना या समीक्षा से बचाने की कोशिश की, बल्कि उन्होंने अपनी मर्जी से ही अपने सारे कार्यों और प्रयोगों को खुलकर लोगों को बताया. 

Mahatma Gandhi's thoughts

ये बात किसी से भी छिपी नहीं है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की sex life बिल्कुल भी सामान्य नहीं थी. वो अक्सर sex से जुड़ी बातें अपने शिष्यों को बताते थे कि किस तरह से उन्हें शुद्धता की प्राप्ति हो सकती है. और उनके ये विचार हमेशा लोगों को पसंद नहीं आए.

स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने गांधी की नव विवाहित जोड़ों को दी गई सलाह को बिल्कुल ‘abnormal और unnatural’ कहा था, जिसमें गाँधी ने उन जोड़ों से ब्रह्मचर्य का पालन करने की बात कही थी. 

सच तो ये है कि हम महात्मा गांधी और उनकी सीखो (Mahatma Gandhi’s thoughts) का सबसे ज्यादा अपमान तब करते हैं, जब हम उनके सिद्धांतो को गहनता से जाने बिना और उसके मूल तत्व को समझे बिना ही उसे स्वीकार या अस्वीकार कर देते हैं. 

Mahatma Gandhi's thoughts

महात्मा गांधी का मानना था कि लोगों को उनके प्रयोगों को सिर्फ उदाहरण के तौर पर देखना चाहिए और उनसे सीखकर लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार अपने खुद के प्रयोग करने चाहिए. 

असल मे  महात्मा गांधी ने अपने जीवन के शुरुआती सालों मे कभी sex या शादी के बाद के सम्बंध को लेकर सख्त रवैय्या नहीं अपनाया जब तक कि वे तीस साल के नहीं हो गये. दक्षिणी अफ्रीका मे हो रहे युद्ध में ब्रिटिश साम्राज्य की मदद करते हुए उन्हें ये एहसास हुआ कि कैसे वे वास्तव मे मानवता की सच्ची सेवा कर सकते हैं. कम आबादी वाले देश मे Boer युद्ध और Zulu uprisings मे भागीदारी करते हुए गांधी ने यह तय किया कि मानवता की सेवा सिर्फ गरीबी और शुद्धता को अपनाकर ही की जा सकती है. 

साल 1906 मे 38 साल की उम्र मे गांधी ने ब्रह्मचर्य का पालन करने की कसम खाई, जिसका मतलब आध्यात्मिक जीवन जीना और शुद्धता को प्राप्त करना था, क्योंकि हिन्दू धर्म मे शुद्धता के बिना आध्यात्मिक जीवन जीना सम्भव नहीं है. 

Mahatma Gandhi's thoughts

गांधी ने मानवता की भलाई करने के लिए गरीबी को तो तुरंत अपना लिया, लेकिन जो बात उनके लिए मुश्किल थी, वो थी शुद्धता को प्राप्त कर पाना. इसलिए उन्होंने अपनी शुद्धता को परखने और साबित करने के लिए कुछ ऐसे complex और कड़े नियम बनाएं, जिससे कि वो सबसे ज्यादा उत्तेजक विचारों, पत्रों और conversation मे शामिल हो कर भी अपने आप को मन, वचन और कर्म से शुद्ध बनाएं रख पाएं. 

खुद को इस तरह बदलने की कोशिश करते हुए, उस शुद्धता का प्रण करने के करीब एक साल बाद महात्मा गांधी ने अपने समाचार पत्र Indian Opinion के सामने अपने विचार रखें, जिसमें उन्होंने कहा ” यह हर एक विचारशील भारतीय का फ़र्ज़ है कि वह विवाह ना करे. और अगर किसी मजबूरी के कारण उसका विवाह हो भी जाता है, तो उसे अपनी पत्नी से और उसके साथ शारीरिक सम्बंध बनाने से बचना चाहिए.” 

इसके अलावा भी गांधी आध्यात्मिक विवाह के पक्ष मे थे. उनके अनुसार महान साहित्यकार रबीन्द्रनाथ टैगोर की बड़ी बहन की बेटी सरला देवी चौधरानी से उनके आध्यात्मिक सम्बंध थे और वे उनकी आध्यात्मिक पत्नी भी थी. 10 अगस्त 1920 को गांधी द्वारा अपने मित्र Hermann Kallenbach को लिखे गए एक पत्र मे गांधी ने ये माना है कि वे सरला देवी को अपनी आध्यात्मिक पत्नी मानते हैं और ज्ञान के आधार पर ही उनका विवाह हुआ है. 

इसके अलावा भी सरला देवी को लिखे गए एक पत्र मे महात्मा गांधी ने कहा है “मैंने spiritual marriage यानी कि आध्यात्मिक विवाह की एक परिभाषा की खोज करी है. ये दो विपरीत sex वाले लोगों के बीच निभाई जाने वाली एक partnership है, जिसमें दोनों के शरीर पूरी तरह से absent होंगे. इसी वज़ह से ये आध्यात्मिक विवाह भाई और बहन, पिता और पुत्री के बीच भी हो सकता है. और इसकी शर्त यही है कि ऐसा विवाह सिर्फ दो ब्रह्मचारियों के बीच मे ही हो सकता है, जो कि मन, वचन और कर्म से शुद्ध हों. ” 

5 जून 1924 को समाचार पत्र Young India मे लिखे गए एक आर्टिकल “ब्रह्मचर्य क्या है?” मे महात्मा गांधी ने ब्रह्मचर्य को ब्रह्म अर्थात सत्य की खोज कहा है, जिसे प्राप्त करने के लिए हर समय हर जगह पर वचन, विचार और कार्यों पर मनुष्य का नियंत्रण सबसे ज्यादा जरूरी है. 

महात्मा गांधी के लिए सम्बंध बनाने की इच्छा और बाकी सारी इच्छाओं पर नियंत्रण करना ही एक सच्चे सत्याग्रही के character का सबसे जरूरी हिस्सा है. उनका मानना था कि शरीर और आत्मा की शुद्धता, इच्छाओं और उत्तेजना पर नियंत्रण ही एक श्रेष्ठ सत्याग्रही का कवच है. 

हमे इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत देश के लिए वो वक्त बढ़ते हुए साम्प्रदायिक दंगों, बंटवारे और बेहद विषम परिस्थितियों का दौर था. ऐसे ही कठिन समय में एक सच्चे सत्याग्रही बनने के लिए और अपनी इच्छाओं पर काबू पाने के लिए महात्मा गांधी ने अपने जीवन काल के 7 वें दशक मे, ब्रह्मचर्य और संबंधो से जुड़े प्रयोगों के लिए, कुछ नए नियम बनाए और उनका पालन करना शुरू किया. एक और बात जो हमे पता होनी चाहिए वो ये कि महात्मा गांधी ने कभी भी लोगों को उन बातों का पालन करने के लिए नहीं कहा, जिन्हें खुद उन्होंने अपना कर नहीं देखा और जांचा हो. 

महात्मा गाँधी के आश्रम मे कई स्त्रियां, जिनमे उनकी भतीजी, मनु (Manu Gandhi) और आभा (Abha Gandhi), और उनकी निजी physician, सुशीला नायर (Sushila Nayar) भी शामिल थी. ये स्त्रियां महात्मा गांधी के साथ उनके प्रयोगों (My Experiments with Truth) का भी हिस्सा थीं. लेकिन इसके बारे मे कुछ भी कहने से पहले हमे उन स्त्रियों के इन प्रयोगों से जुड़े विचार (Mahatma Gandhi’s thoughts) भी जरूर जानने चाहिए.

अपनी निजी डायरी मे 28 अक्टूबर, 1946 के दिन लिखे गए विचार मे, मनु गांधी लिखती हैं “बापू मेरे लिए मेरी मां हैं. अपने ब्रह्मचर्य पर किए प्रयोगों के जरिये वे मुझे मानवता के श्रेष्ठ स्तर तक ले जा रहे हैं, जो कि उनके चरित्र निर्माण के महायज्ञ का ही एक हिस्सा है. इस प्रयोग के बारे मे किसी भी तरह की अभद्र बात निंदायोग्य है.” 

इसके अलावा सुशीला नायर (Sushila Nayar) का भी कहना है कि गांधी के साथ किए गए इन ब्रह्मचर्य के प्रयोगों के दौरान उन्हें कभी भी कोई उत्तेजना की अनुभूति नहीं हुई, बल्कि उन्हें हमेशा यही लगा कि वे बिस्तर पर अपनी मां के साथ सो रही हैं. 

इस प्रयोग से जुड़ी किसी भी स्त्री ने कभी यह नहीं कहा कि कभी भी महात्मा गांधी ने अपनी इच्छा पर नियंत्रण खोया या कभी उनके बीच किसी भी तरह का कोई शारीरिक व्यवहार हुआ. 

अपनी शुद्धता को प्राप्त करने के लिए इस तरह के प्रयोगों को करने के लिए गांधी की आलोचना की जाती है कि इस सबकी वज़ह से इस प्रयोग मे लिप्त स्त्रियों के मन पर बुरा असर हुआ होगा . 

लेकिन कोई भी विचारशील व्यक्ति इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि उनका ब्रह्मचर्य का प्रयोग किसी भी तरह की sexual desire से परे, व्यक्ति के जीवन मे और देश की राजनीति के ethics मे आध्यात्म को शामिल करना था. 

असल मे सिर्फ इसी बात से यह साबित हो जाता है कि महात्मा गांधी ने कभी भी अपने इन प्रयोगों को छुपाने या ढंकने की कोशिश नहीं की, बल्कि उन्होंने खुलकर इन प्रयोगों पर बात की और लोगों को भी इनसे सीख ले कर अपने खुद के प्रयोग करने की सलाह दी. अंत मे हम यही कह सकते हैं कि महात्मा गांधी वास्तव मे सत्य और ब्रह्म की खोज करना चाहते थे और उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं था. 

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