Parle G- Mehnat ki kamai Story in Hindi by Kavi Agyat

Parle G- Mehnat ki kamai is story written by Kavi Agyat, which shows the efforts made by a poor old barber, to get a cup of tea and biscuit packet..

Parle G- Mehnat ki kamai Hindi Story

जब बुढ़ापे में मेरी आँखें लगभग बंद होने की कगार पर होंगी और मेरा दिल कभी भी धड़कना छोड़ने वाला होगा, तब एक वाकया है जो मेरी आँखों के आगे तैरेगा और शायद मुझे कुछ एक पल और जीने के लिए प्रेरित करेगा|

यह वाकया आज सुबह का ही है| मेघों के देवता का रथ, उस शहर में फिलहाल ठहरा हुआ है, जहां हाल फिलहाल में मेरा भी ठहराव है|
बात आज सुबह की है, मैं सड़कों से जान पहचान बनाते हुए अपनी मंजिल की तरफ तरफ धीमे धीमे कदमों के साथ बढ़ रहा था| चारो ओर लोग अपने अपने कामों में लगे हुए थे| धोबी, हलवाई, ठेले टैम्पो वाले और नाई| इन्ही सबके साथ आसमान में खड़े बादलों ने भी अपना काम शुरू कर दिया था|

धीमी धीमी बारिश जो एक बार शुरू हुई तो रुकने का नाम ही नहीं लिया| मैंने भी आस पास छत ढूंढकर खुद को बचाया और अगल बगल होने वाली गतिविधियों को देखने लगा| मैंने एक बूढ़े आदमी को देखा| उस बूढ़े आदमी की दुकान या यूं कहूँ काम चलाऊ सेटअप सड़क के एक कोने पर लगा हुआ था|

Mehnat ki kamai is a heart touching story of an old man and his struggles.

वो नाई था और सामान के नाम पर उसके पास सिर्फ एक कुर्सी, कुछ कैंचीयां, उस्तरे रखे हुए थे| आम तौर पर जिन ब्यूटी पार्लर में आप जाते रहे होंगे उनमें कुर्सियों के सामने बड़े बड़े शीशे लगे होते होंगे लेकिन वहां पर कुर्सी के पीछे एक शीशा टंगा था, जो काम हो जाने के बाद ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए वहां मौजूद था केवल|


बुजुर्ग का हुलिया कुछ यूं था कि बदन पर केवल एक बनियान थी, कमर के नीचे एक घुटनों तक मुड़ी हुई धोती, झुर्रियों वाले चेहरे पर हल्के हल्के सफेद सफेद बाल, चौड़ा सपाट लेकिन झुर्रियों से बना माथा, और फुर्ती से चलते हाथ| उसकी आँखों पर पुराने फ्रेम का एक चश्मा था और उन चश्में के पीछे आँखों में खूब सारा ठहराव| दुकान पर ज्यादा लोग नहीं थे| केवल एक ग्राहक था जो कि कुर्सी पर बैठा था और एक छोटा सा बच्चा बुजुर्ग के पास ही खड़ा था जो कि लगभग 5-6 साल का होगा|

वह बच्चा बार बार उस बूढ़े नाई से कहता और नाई उसे बार बार हाथों के इशारों से कुछ कहता| इशारों से लग रहा था कि वह उसे रुकने के लिए कह रहा है|


कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की हजामत बननी शुरू ही हुई थी| उसी दौरान जैसा कि मैंने बताया कि बारिश हो रही थी, जिस कारण से उसकी दुकान में पानी भरने लगा था| ये शहर ही ऐसा है कि 15 मिनट की बारिश में पानी घुटनों तक भर जाता है| बहरहाल, बुजुर्ग के हाथ फुर्ती से अपना काम कर रहे थे, लेकिन कई बार गलती से, हाथों की फिसलन के कारण वह अपनी उँगलियों पर हल्के हल्के कट लगा ले रहा था| उन हल्की हल्की चोटों से उसकी उंगलियां लगभग खून से सन चुकीं थीं| उसके चेहरे से पसीनें की बूंदे लगातार गिर रहीं थीं|

सर पर डाली गई टीन भले ही बारिश के कारण ठंडी हो चुकी हो, लेकिन उमस ने बुजुर्ग के पूरे शरीर को पानी से भर दिया था| पसीना उसकी आँखों से होते हुए उसके चश्मे तक आता और चश्मे की तिल्ली से होते हुए जमीन पर जमे पानी में गिरता, टप| यह हजामत 45 मिनट तक चली, जिस दौरान बुजुर्ग ने सुबह के पहले ग्राहक को खुश करने के लिए हजामत के आखिरी चरण तक की हर प्रक्रिया को पूरा किया| जिसे महंगे पार्लर में मसाज और फेशियल कहते हैं|

45 मिनट की मेहनत के बाद वह आदमी अपनी पेंट मोड़ते हुए जमीन पर उतरा| बारिश तब तक बंद हो चुकी थी और जमा हुआ पानी धीरे धीरे कम हो रहा था| उस आदमी ने अपनी जेब एक दस और एक पांच का नोट निकाला और चेहरा सिकोड़ते हुए उस बुजुर्ग को थमा दिया| उस बुजुर्ग ने खून से सनी उँगलियों से उन रुपयों को लिया और ऐसा करने से उनके ऊपर भी खून लग गया|

Mehnat ki kamai Story makes you think about how these people have to survive in their daily day to day life.

पेंट की अचकन को ऊपर खींचते हुए वह आदमी दुकान के बाहर चला गया| बुजुर्ग ने पलटकर वो पंद्रह रुपए पास के ही चाय वाले को दे दिए| बदले में उसने ली दो चाय और एक बिस्किट का पैकेट| पैकेट उस छोटे बच्चे के हाथ में था जो बगल में खड़ा था| बुजुर्ग के हाथों का इशारा मुझे तब समझ आया| यह एक सामान्य घटना थी, लेकिन असामान्य था बुजुर्ग के चेहरे का भाव|

जब उसने उन रुपयों को खर्च किया| वो उसकी 45 मिनट की मेहनत थी, लेकिन ऐसा लगा जैसे उसकी जेब में सैकड़ों पंद्रहइयां हों| वो रुपए बहुत सोच समझ के भले ही खर्च किए गए होंगे, लेकिन उस खर्च करने में कंजूसी नहीं थी| मुझे बस इतना ही धनवान होना है|

लेखक :- कवि अज्ञात

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