Sadhguru (सदगुरू): Quotes, Age, Wife, Daughter, Biography in Hindi

नाम (Name)जग्गी वासुदेव (Jaggi Vasudev)
उपनाम (Nickname)सदगुरू (Sadhguru)
पेशा (Profession)योगी और आध्यात्म गुरु (Indian Yogi and a Mystic Teacher)
जन्मतिथि (Date of Birth)3 सितम्बर, 1957
हाईट (Height)5’8″ (172 cm)
उम्र (Age)62 वर्ष (62 years)
निजी जीवन (Personal Life)
जन्मस्थान (Place of Birth)मैसूर, कर्नाटक, भारत (Mysore, Karnataka, India)
राशि (Zodiac)कन्या राशि (Virgo)
राष्ट्रीयता (Nationality)   भारतीय (Indian)
धर्म (Religion)हिन्दू (Hinduism)
शिक्षा (Educationअंग्रेजी साहित्य में स्नातक (Bachelor’s Degree in English Literature)
स्कूल (School)डेमोंस्ट्रेशन स्कूल, मैसूर 
कॉलेज (College)मैसूर यूनिवर्सिटी
रुचियां (Hobbies)गोल्फ, क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलना, बाइकिंग और ट्रेकिंग करना
रिलेशनशिप और फ़ैमिली (Relationship & Family)
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)विवाहित (Married; Widower)
विवाह की तिथि (Marriage Date)महाशिवरात्रि (1984)
पत्नी (Wife/ Spouse)विजयकुमारी (Vijaykumari) (बैंकर, 23 जनवरी, 1997 को देहांत हो गया)
संतान (Children)पुत्री: राधे जग्गी (Radhe Jaggi) (Classical Dancer)
पिता (Father)डॉ. वासुदेव [Dr. Vasudev] (नेत्ररोग विशेषज्ञ) (Ophthalmologist)
माता (Mother)सुशीला वासुदेव (Susheela Vasudev)
कुल संपत्ति (Net worth)250 करोड़ रुपये

Sadhguru Hindi

Sadhguru Quotes: 

“ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत पल वे होते हैं, जिनमे आप अपनी खुशी ज़ाहिर कर रहे होते हैं, वे नहीं जिनमे आप इससे ढूंढ रहे होते हैं।”

“आपके जीवन में हर एक पल में आपके सामने करोड़ो चमत्कार हो रहे होते हैं; किसी फूल का खिलना, पक्षी का चहचहाना, भौंरे का गुनगुनाना, बारिश की बूंदों का गिरना, किसी ठंडी शांत शाम में बर्फ का गिरना। ये सब किसी जादू की तरह है, जो आपके चारों तरफ है। अगर आप इसे जीना सीख जाएं, तो ज़िंदगी आपको रोज़ किसी नये चमत्कार जैसी नज़र आएगी।”

“अगर आप बदलाव का विरोध कर रहे हैं, तो इसका मतलब आप अपनी ज़िंदगी का विरोध कर रहे हैं।”

“किसी की बात को सुनना सीख पाना ही बुद्धिमत्तापूर्ण ज़िंदगी है।”

“अपनी ज़िंदगी को भरपूर जीना ही, ज़िंदगी के हर एक मायने और इसकी गहराई को समझ पाना है।”

“जीवन में इतना रोमांच है, जिसे सिर्फ युवा ही समझ सकते हैं। ये वो उम्र नहीं है, जिसे मज़े के लिए गुज़ारना चाहिए- बल्कि ये वो उम्र है, जिसे नये रोमांच और खोज के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए।”

“अगर आप 100% तर्क के साथ सब-कुछ सोचेंगे, तो फिर ऐसे जीवन की कोई सम्भावना ही नहीं है।”

“आपके जीवन की गुणवत्ता इस पर निर्भर करती है कि आप कितने अच्छे से अपने शरीर, अपने भावों, अपनी परिस्थितियों, अपने घर, अपने समाज, देश और अपनी ज़िंदगी को कितने अच्छे से सम्भालते हैं।”

“आपको कितनी कैलोरी का खाना खाना चाहिए और कितने घंटे की नींद लेनी चाहिए, ज़िंदगी जीने का यह एक बहुत मूर्खतापूर्ण तरीका है।”

“अगर आप ज़िंदगी के साथ थोड़ा हंसकर रहते हैं, तो आपका हर एक पल किसी उत्सव के जैसा होगा।’

“अगर आप अपनी ज़िंदगी मे लगातार नई चीजों का सामना कर रहे हैं, तो इसका मतलब कि आप एक बेहतर और अपार सम्भावनाओं से भरी जिंदगी जी रहे हैं।”

Sadhguru Quotes

Sadhguru Jaggi Vasudev: (सदगुरू जग्गी वासुदेव)

Sadhguru (सदगुरु) जग्गी वासुदेव एक भारतीय योगी और आध्यात्मिक गुरु है, जो योग और आध्यात्म के प्रति लोगों को जागरूक बना रहे हैं। सदगुरु को जटिल और आध्यात्म से जुड़े प्रश्नों के जवाब देने और प्राचीन भारतीय योग को आज के आधुनिक जीवन से जोड़ने के लिए भी काफी पसंद किया जाता है। सदगुरु ने तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में ईशा योग केंद्र की स्थापना की और साथ ही पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दों के लिए भी आवाज़ उठाई। सदगुरु एक विश्व पर्यटक भी हैं, जो अलग- अलग संस्थानों और संगोष्ठियों में जाकर आध्यात्म पर स्पीच देते हैं। वे योग और आध्यात्म को बढ़ावा देते हैं, जो व्यक्तिगत परिवर्तन, स्वच्छ जीवन और सामाजिक जागरूकता को जन्म देता है। उन्हें अक्सर एक हिन्दू राष्ट्रवादी भी कहा जाता है, जो कि सही नही है। 

Early Life: 

Sadhguru जग्गी वासुदेव का जन्म 5 सितम्बर, 1957 को कर्नाटक के मैसूर में हुआ था। उनके पिता वासुदेव एक डॉक्टर थे, जो अपने काम के सिलसिले में पूरे देश में यात्रा करते थे। एक बच्चे के तौर पर जग्गी काफी ज्यादा आध्यात्मिक और थोड़े से उग्र भी थे। वे स्कूल में जल्दी ही बोर हो जाते थे और बाहर खेलने भाग जाते थे। स्कूल से भागकर वे किसी गांव, तालाब या पहाड़ी पर जाकर खुद को प्रकृति के पास ले जाते थे। उनके पास एक साइकिल थी, जिसे चलाकर वे अक्सर लम्बी यात्राएं करते थे। 

जब 13 साल की उम्र में वे एक 70 वर्षीय योगी से मिले, और उसका योग देखकर वे काफी प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्होंने हाथ- योग सीखना शुरू कर दिया। 

अपने निडर स्वभाव के चलते उन्होंने सांप पकड़ने का काम शुरू कर दिया और वे बिना डरे अपने हाथ से ही सांप को पकड़ लेते थे। 

अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में अपना स्नातक पूरा किया। जिसके बाद आगे न पढ़ने की इच्छा रखते हुए, उन्होंने एक मुर्गी फार्म खोल लिया। जिसमे उन्होंने काफी मेहनत की, और इससे कमाई हुई राशि से जग्गी ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई। जब वे काम नही कर रहे होते थे, तो वे सड़क पर तेज़ स्पीड में अपनी मोटरबाइक चला रहे होते थे। सदगुरु और उनके दोस्त अक्सर चामुंडी पहाड़ी पर जाकर रुकते थे और वहां बातें करते थे।

Self-realisation

25 की उम्र तक, जग्गी अपनी ज़िंदगी मे सेटल हो रहे थे, लेकिन ये सब अचानक बदलने वाला था। 23 सितम्बर, 1982 को जग्गी ऐसे ही घूमते हुए अपनी मोटरबाइक से चामुंडी पहाड़ी पर आ गए। वहां आने का उनका कोई विशेष कारण नही था, उन्हें बस इस पहाड़ी से कुछ लगाव- सा था। वहां वे एक चट्टान पर बैठे थे, कि तभी अचानक वे आध्यात्मिक अवस्था मे चले गए। सदगुरु बताते हैं कि ज्ञान की प्राप्ति का एहसास उन्हें किसी उपलब्धि की तरह नहीं, बल्कि घर लौट कर आने जैसा महसूस हुआ। जब उन्हें वापस होश आया तो, शाम हो चुकी थी और कई घंटे बीत चुके थे। ये एक ऐसा अनुभव था, जिसने हमेशा के लिए उनकी ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी। 

इसके बाद उन्होंने कंस्ट्रक्शन का काम छोड़कर योग और आध्यात्म का अभ्यास करना शुरू कर दिया। लोगों को उनसे बात करके उनमे किसी प्रकार की दिव्य शक्ति होने का आभास होता और लोग उनसे अपने दुखों का समाधान पूछने आने लगे। सिर्फ इतना ही नही, सदगुरु में शारीरिक परिवर्तन भी साफ नजर आने लगे, उनकी आवाज़ गहरी हो गई, उनकी आंखें बड़ी और अधिक चमकीली हो गईं। इसके एक साल बाद उन्होंने योग सिखाने का निर्णय लिया और फिर आगे चलकर उन्होंने अपने ईशा योग केंद्र की स्थापना की। 

Sadhguru Quotes

1984 में एक योग कार्यक्रम के दौरान, उनकी मुलाकात विज्जी से हुई। उन्हें एक दूसरे का साथ काफी पसंद आने लगा और फिर अलग- अलग जाति के होने की वजह से अपने माता-पिता के विरोध करने के बावजूद उन्होंने शादी करने का निश्चय किया। बाद में, उनके एक पुत्री राधे हुई, जो अब एक प्रशिक्षित योग शिक्षक और क्लासिकल डांसर है। 

जैसे जैसे जग्गी के साथ लोग जुड़ते गए, वैसे वैसे उनके व्यक्तित्व में बदलाव होता गया और फिर सिर्फ एक पर्यटक और योग शिक्षक के अलावा, वे एक आध्यात्मिक गुरु बन गए। 

Sadhguru: Isha Foundation

1992 में उन्होंने औपचारिक तौर पर तमिलनाडु के वेलंगिरी पर्वत पर ईशा फाउंडेशन की स्थापना कर दी। ईशा फाउंडेशन के ज़रिए वे अपने शिष्यों को योग या ‘इनर इंजीनियरिंग’ सिखाते हैं। जैसे- जैसे जग्गी के अनुयायी बढ़ते गए, वैसे वैसे वे और निखरते गए- एक बाइक सवार पर्यटक से आगे हटकर उन्होंने एक आध्यात्मिक गुरु बनने की ज़िम्मेदारी उठाई। यही वो वक्त था, जब वे सदगुरु के नाम से लोगों के बीच जाने जाने लगे। उन्होंने लोगों को ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। सदगुरु के अनुसार, किसी चीज का त्याग करना ब्रह्मचर्य नही है, बल्कि ये तो मानवीय अभिलाषाओं के परे जाकर वास्तविक ब्रह्म को पहचानना है। 

1997 में कई सालों की कठिन आध्यात्मिक अभ्यास के बाद, उनकी पत्नी विज्जी ने महासमाधि ग्रहण की- यह एक दुर्लभ अवस्था है, जिसमे एक योगी अपनी इच्छा से प्राणों का त्याग कर देता है। एक इंसान के तौर पर, सदगुरु को विज्जी के जाने का दुख हुआ, लेकिन एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में, उन्हें उसकी आध्यात्मिक उपलब्धि पर गर्व हो रहा था। हालांकि, विज्जी के पिता ने सदगुरु के खिलाफ एक एफआईआर की, जिनमे उन्होंने सदगुरु पर विज्जी की जान लेने का आरोप लगाया। पुलिस की काफी खोजबीन और जांच के बाद, उनका यह आरोप निराधार साबित हुआ। 

सदगुरु के लिए 1997 एक महत्वपूर्ण वर्ष था, क्योंकि उन वर्ष उन्होंने ध्यानलिंग (आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र) की स्थापना करने का निश्चय किया था। परंतु, विज्जी के जाने के बाद इस पर कुछ विराम लग गया। उसी दौरान सदगुरु के आश्रम पर भी कुछ अराजक तत्वों द्वारा हमला किया गया और उनके आश्रम में गैर- कानूनी गतिविधियां होने की अफवाह उड़ाई गई। हालांकि, सदगुरु और उनके शिष्यों ने इस कठिन वक्त में भी अपना कार्य जारी रखा और वे अपने उद्देश्य से डिगे नहीं। 

अब इतने सालों बाद भी, ईशा केंद्र तमिलनाडु ही नही, पूरे भारत और विश्व के लिए महत्वपूर्ण योग केंद्र बनकर उभरा है। सदगुरु कटे हैं कि उनका मकसद किसी तरह की सतही आध्यात्मिकता को सिखाना नहीं है, बल्कि वे सिर्फ लोगों को थोड़ा ज्ञान और बेहतर जीवन जीना सिखाना चाहते हैं। 

Adiyogi: The Shiva: Dhyanalinga (ध्यानलिंग)

इसके बाद, 23 जून, 1999 को आखिरकार ध्यानलिंग का शिलान्यास किया गया। सदगुरु का मानना है कि जो भी व्यक्ति ध्यानलिंग के पास आध्यात्मिक अभ्यास करेगा, वह अधिक गहराई से आध्यात्म को समझ सकेगा और वो भी तेज गति से। इसके लिए किसी विशेष मत या विश्वास की आवश्यकता नहीं है, बस आपका हृदय इसके लिए खुला होना चाहिए। 

सदगुरु ने 2017 में आदियोगी (शिवा) की एक बड़ी मूर्ति का निर्माण करवाया, जिसका उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य लोगों को योग द्वारा अपने अन्तः स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। 

Sadhguru Books:

सदगुरु एक हुनरमन्द कवि और लेखक भी हैं, जिन्होंने 8 से भी अधिक भाषाओं में किताबें लिखी हैं। जैसे अंग्रेजी में- ‘Inner Engineering: A Yogi’s Guide to Joy’,’Adiyogi: The Source of Yoga’,’Three Truths of Well Being’,’Encounter the Enlightened’,’Mystic’s Musings’,’Pebbles of Wisdom’ और हिंदी में ‘योगी: सदगुरु की महायात्रा”,”सृष्टि से सृष्टा तक ”,”एक आध्यात्मिक गुरु का आलौकिक ज्ञान”,”आत्मज्ञान: आखिर है क्या”,”मृत्यु एक कल्पना है”,’‘राह के फूल” इत्यादि।

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