Ship Technology being used in Planes वो टेक्नॉलजी जो शिप से प्लेन में अडॉप्ट की गईं हैं

Technology taken in planes from Ships प्लेन्स से ज्यादा एडवांस थे शिप

दोस्तों आपने कितनी बार प्लेन मे सफर किया है? और ये भी बताइए कि आखिरी बार शिप में आपने कब ट्रेवल किया था? जाहिर सी बात है कि आपने प्लेन में शिप से ज्यादा बार ट्रेवल किया होगा. इसके पीछे कारण है कि प्लेन बहुत ज्यादा फास्ट होते हैं, शिप बहुत ज्यादा स्लो होते हैं लेकिन क्या इसलिए भी क्योंकि प्लेन एडवांस होते हैं? नहीं. अगर आपको लगता है ऐसा है तो इस भ्रम को दूर करने के लिए ये आर्टिकल “Top 5 Ship Technology being used in Planes” ज़रूर पढ़ें. 

Top 5 plane technologies taken from ships:

एक समय था जब धरती पर planes नहीं हुआ करते थे. तब हमें कहीं दूर ऐसी जगह पर जाना होता था जहां पर जाना काफी मुश्किल हो और बैलगाड़ी या घोड़ा गाड़ी से ना जा सकें तो हम पानी वाले जहाज का उपयोग करते थे. पानी वाले जहाज को उस समय का बहुत बड़ा अविष्कार माना जाता था हालांकि अब इन्हे प्लेनस के सामने बहुत ही कम भाव दिया जाता है और वो सभी लोग जिन्हे अपना समय बचाना हो वो प्लेन्स का ही यूज करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं शिप्स की कई सारी ऐसी techniques हैं जिन्हे प्लेन्स में उपयोग किया गया है. कौन सी हैं वो टेक्निक और आखिर उनका उपयोग क्या है? अगर आपके मन में भी दौड़ रहे हैं यही सवाल तो इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें और पोस्ट में आगे बढ़ने से पहले हमारे ब्लॉग INKLAB को फॉलो करना ना भूलें. 

■ Design of Plane – प्लेन की डिजाइन 

दोस्तों किसी भी व्हीकल का डिजाइन सबसे ज्यादा बेसिक चीज होती है और अगर हम बात करें प्लेनस के डिजाइन की तो ऐसा माना जाता है कि प्लेन्स का डिजाइन भी शिप से ही लिया गया है. प्लेनस और शिप में ऐसा डिजाइन इसलिए होता है ताकि वो एयर और वाटर में सर्वाइव कर सके और सिंक ना करें. हालांकि ये बहुत कॉमन टेक्निक है और लेकिन शिप प्लेन्स के पहले आए थे इसलिए इस टेक्निक का क्रेडिट शिप को ही मिलना चाहिए. दोस्तों एक चाइनीज थ्योरी ये भी कहती है कि शिप का डिजाइन बर्ड्स से लिया गया था. History भी कितनी कन्फ्यूजिंग है ना? 

Ship Technology in Planes
Design of Plane

■ Pilotage used in planes- पायलटेज

शिप्स को चलाते समय उनके साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही होती थी कि वो डायरेक्शन नहीं ढूंढ पाते थे. एक बार किनारे से दूर हो जाने के बाद हर तरफ बस समुद्र ही समुद्र होता था, और उसके बाद, अगर वो डायरेक्शन भूल जाएं तो वो गलत किनारों तक भी पहुंच जाते थे. इस मुसीबत से निबटने के लिए पायलटेज का निर्माण किया गया. ये एक तरह का नक्शा होता था जिसमें काफी दूर से विजिबल बिल्डिंग, लैंडमार्क और तरह तरह के अलग अलग निशान जैसे कि नदी के मुहाने और समुद्र के किनारे पर बने फोर्ट या फिर रिलीजियस प्लेस को एड कर दिया जाता था, इसका फायदा ये था कि अगर कोई इन्हे दूर से भी देखे तब उन्हे पता चल जाता था कि उन्हे किस तरफ़ जाना है. इस टेक्निक को शिप का सबसे बड़ा हथियार कहा जाता था क्योंकि अगर ये टेक्निक नहीं होतीं, तब रेडार के आने से पहले कोई भी शिप सही जगह नहीं पहुंचता. 

दोस्तों शिप्स से इसी टेक्निक को प्लेन्स में अडॉप्ट किया गया है. प्लेन्स के पायलट को आज भी ऐसा ही नक्शा दिया जाता है जिसमें कि तरह तरह के सिंबल बने होते हैं इन सिंबल में काफी कुछ डिनोट किया गया होता है जैसे कि नदी या फिर पहाड़. वो बिल्डिंग्स जिनका रास्ते में आने का डर होता है उन्हे भी एड किया जाता है. दोस्तों अब तो रेडार है इसलिए, इस नक्शे का बहुत फायदा होता है लेकिन जब ना एयरपोर्ट थे ना रेडार, ना ही किसी तरह का एयर ट्रैफिक कंट्रोल तब ये नक्शे प्लेन्स के पायलट की बहुत मदद करते थे. वैसे रेडार से याद आया कि रेडार भी उन्ही टेक्निक में से एक है जिन्हे शिप से अडॉप्ट किया गया है और दोस्तों इस आर्टिकल के अन्त में आपको पता चल जाएगा कि रेडार किस तरह से काम करता है. 

Ship Technology in Planes
Pilotage used.

■ Navigation In Lights (नेविगेशन इन लाइटस) : लाइट्स की मदद से आवागमन

हम जब भी रात में प्लेन्स को उड़ता हुए देखते हैं तब हमें प्लेन तो नहीं, लेकिन उनकी लाइटस जरूर नजर आती हैं. दोस्तों क्या आपने सोचा है कि आखिर इन लाइटस का काम क्या है? प्लेन की लाइट टेक्नोलॉजी को भी शिप से ही लिया गया है. दोस्तों पहले शिप बिना लाइट के चला करते थे और भारी मात्रा में एक्सिडेंट हुआ करते थे, उसके बाद इन एक्सिडेंट का तोड़ निकाला गया और लाइट टेक्नोलॉजी इंट्रोड्यूस की गई. इस टेक्नोलॉजी में ग्रीन लाइट शिप के राइट साइड में, रेड लाइट शिप के लेफ्ट साइड में और शिप के मिडल में व्हाइट लाइट लगाई जाती थी. दोस्तों ये लाइटस आगे की तरफ लगी होतीं थी. इन लाइटस की मदद से आस पास से गुजर रहे शिप अंधेरे में भी ये जान जाते थे, दूसरा शिप किस तरफ से आ रहा है और किस तरफ जा रहा है. जैसे मान लीजिए आप किसी शिप के कैप्टन है और आपको ग्रीन और व्हाइट लाइट नजर आ रही है, इसका मतलब ये है कि शिप आपके लेफ्ट साइड से पास हो रहा है. अगर आपको रेड लाइट और व्हाइट लाइट नजर आती हैं तब यह समझ लीजिए कि यह शिप आपके राइट साइड से जा रहा है और अगर आपको तीनों लाइटस नजर आ रही हों तो शिप आपकी ही तरफ आ रहा है. अब ऐसे में क्या करना है? अगर दोनों ही शिप एक डायरेक्शन में मुड़ गए तब क्या होता होगा, ये आपको पता चलेगा अगले पॉइंट में. दोस्तों शिप के पीछे भी एक व्हाइट लाइट लगाई जाती है जिसका मतलब ये होता है कि शिप आगे की तरफ जा रहा है. शिप की ये टेक्नोलॉजी प्लेनस में भी अडॉप्ट की गई है. 

■ Right Hand Rule – राइट हैंड रूल – हमेशा दायीं ओर मुड़ें

आपके मन में अभी ये सवाल तो आया ही होगा कि अगर दो शिप आमने सामने आ गए तब आपका शिप किस डायरेक्शन में सेफ रहेगा. दोस्तों इस प्रॉब्लम से निकलने के लिए राइट हैंड रूल इंट्रोड्यूस किया गया था, जिसकी अकॉर्डिंग ऐसी किसी भी सिचुएशन में शिप राइट हैंड साइड में मुडे़गा. इस रूल को प्लेनस में भी अडॉप्ट किया गया है. इसलिए कभी कोई प्लेन लेफ्ट हैंड साइड में नहीं मुड़ता है. प्लेन टेक्नोलॉजी में भले ही इस रूल को सीरियसली फॉलो किया जाता हो लेकिन दोस्तों शिप इसे पूरी तरह फॉलो नहीं करते और ऐसा करने की जरूरत भी क्या है. उनके पास एक भरा पूरा समुद्र रहता है वो जिस तरफ चाहे उस तरह मुड़ सकते हैं और इससे बहुत ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता. 

■ Use of Radar – रेडार का प्रयोग

हमारी लिस्ट में आखिरी पॉइंट है रेडार. रेडार को भी शिप से ही अडॉप्ट किया गया था. कैसे, आइए जानते हैं. रेडार का इंवेंशन 1935 में हुआ था और प्लेनस का इंवेंशन 1903 में. रेडार को प्लेन के इंवेंशन के कई सालों बाद भले ही बनाया गया हो लेकिन दोस्तों उसका प्रयोग सबसे पहले शिप में किया गया था. ऐसा कहा जा सकता है कि रेडार को भी शिप से ही अडॉप्ट किया गया है. क्या आप जानना चाहते हैं कि रेडार किस तरह काम करता है? हालांकि रेडार एक बहुत बड़ा टॉपिक है लेकिन अगर हम इन शॉर्ट समझें तो रेडार एक वेव थ्रो टेक्नोलॉजी है. रेडार का काम है कि वो कोई भी चीज़ जो कि रेडार की रेंज में आ गई हो उसका पता लगाकर वो नोटिफाई करे. रेडार वेव्स को भेजता है और फिर उसके बाद अगर उसकी वेव्स किसी एयरक्राफ्ट से टकराती हैं तो वो वेव्स वापस रेडार पर आ जाती हैं. उसके बाद रेडार सिग्नल देता है कि उसकी रेंज में कुछ है. 

Ship Technology in Planes
Radar system was first used in ships.

दोस्तों अब आप जान चुके हैं कि शिप्स भले ही अब के टाईम पर आउटडेट हो चुके हों, लेकिन एक समय था जब शिप्स से ज्यादा एडवांस कुछ नहीं था. हमें कमेन्ट करके बताएं कि आप लास्ट टाईम प्लेन या शिप में कब गए थे और आपने कहाँ ट्रेवल किया था. दोस्तों हमें कमेन्ट करके ये भी बताइए कि आपको क्या लगता है आने वाले समय में ऐसी कौन सी टेक्नोलॉजी होगी जो कि बहुत ज्यादा एडवांस हो जाएगी. 

और हाँ आप इसके साथ ही अगर आप चाहते हैं कि आपके टॉपिक पर हम केस स्टडी करें तो हमें कमेन्ट करके अपना टॉपिक जरूर दें. आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद. 

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