स्टीफन हॉकिन्ग की जीवनी – Interesting Facts About Stephan Hawking

पूरा नाम (Full Name) :  स्टीफन विलियम हॉकिंग  (Stephen William Hawking) 
उपनाम (Nickname):  आइंस्टीन (Einstein) (स्कूल में) 
हाइट (Height):  5’6½″ (169 cm।)
पेशा (Profession) :थ्योरेटिकल फिजीसिस्ट (Theoretical Physicist) 
जन्मतिथि/ जयंती (Birthday/ Jayanti): 8 जनवरी 1942 (गुरुवार) (8 January, 1942) (Thursday)
जन्मस्थान (Place of Birth):  ऑक्सफोर्ड इंग्लैंड (Oxford England) 
मृत्यु की तिथि (Date of Death): 14 मार्च, 2018 (14 March, 2018)
मृत्यु के समय उम्र (Age at the time of Death): 76 वर्ष (76 Years) 
मृत्यु का स्थान (Place of Death) :कैंब्रिज, इंग्लैंड  (Cambridge, England)
मृत्यु का कारण (Cause of Death):क्रॉनिक इलनेस (Chronic Illness) 
स्मारक (Memorial): वेस्टमिंस्टर एब्बे, लंदन (Westminster Abbey, London) 
पिता (Father):फ्रैंक  हॉकिंग (Frank Hawking) Research biologist 
माता (Mother):  इसाबेल हॉकिंग (Isobel Hawking) Medical Research secretary 
भाई (Brothers):एडवर्ड (Edward) adopt किया हुआ) 
बहन (Sister): फिलिपा, मैरी (दोनों छोटी) 
जीवनसाथी Spouse(s) :    जेन वाइल्ड (Jane Wilde) {1965 में विवाह और 1995 में तलाक}
​ऐलेन मेसन (Elaine Mason) {1995 में विवाह और 2007 में तलाक}
सन्तान (Child) Sons (पुत्र): रॉबर्ट हॉकिंग (जन्म 1967), टिमोथी हॉकिंग (जन्म 1979) 
Daughters (पुत्री):   लकी हॉकिंग (जन्म 1970) 
कॉलेज (College) :University College, Oxford (BA) Trinity Hall, Cambridge (PhD)
शिक्षा (Education):पीएचडी (PhD) 
जातीयता (Ethnicity): पिता अंग्रेज, माता स्कॉटिश
राष्ट्रीयता (Nationality):ब्रिटिश (British) 
पसंदीदा खेल (Favourite sport):Rowing
पसंदीदा गाना (Favourite song): “Have I told you lately” Rod Stewart Love Ballad. 
पसंदीदा फिल्म (Favourite film):Jules and Jim (1962) 
वैज्ञानिक कैरियर (Scientific career)- 
क्षेत्र (Field): general relativity, Quantum gravity 
थीसिस (Thesis) : Properties of expanding universe 
संस्थान (Institutions): Gonville and Caius College, Cambridge, 
California Institute of Technology, Perimeter Institute for Theoretical Physics
नेट वर्थ (Net Worth):  दो करोड़ (2016 के अनुसार) 

Stephen Hawking: Career, Theories, family, books, disease, death (स्टीफन हॉकिंग)

Stephan Hawking life

जिंदगी कितनी भी मुश्किल लगे, लेकिन कुछ ना कुछ ऐसा होता है जिसको कर के आप सक्सेसफुल (successful) हो सकते हैं। सिर्फ जरूरत होती है तो गिव अप ना करने की। ये कहना था महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग (Stephan Hawking) का। उन्होंने सिर्फ इस बात को कहा ही नहीं बल्कि अपने जीवन में अपनाया भी। स्टीफन का जीवन काफी मुश्किलों से भरा हुआ था। वो एक डिफरेंटली एबल्ड इंसान थे। बचपन में ही वो ए.एल.एस नाम की एक खतरनाक बीमारी के शिकार हुए जिसकी वजह से उनका पूरा शरीर पैरालाइस (Paralyse) हो गया। इसके बावजूद स्टीफन ने वैज्ञानिक बनने के अपने सपने को सार्थक किया और ये साबित कर दिया कि उनके स्कूल के दोस्तों द्वारा उन्हें दिया गया नाम आइंस्टीन गलत नहीं था।

हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को हुआ था। जब स्टीफन पैदा होने वाले थे उस समय वर्ल्ड वार 2 चल रहा था और स्टीफन के माता पिता उस समय लंदन के हाईगेट सिटी में रहते थे। यहाँ अक्सर बमबारी हुआ करती थी इसलिए बच्चे के जन्म से पहले स्टीफन के पैरेंट्स ऑक्सफोर्ड शिफ्ट हो गए और वहीं स्टीफन का जन्म हुआ। इसके बाद जब हॉकिंग आठ साल के थे तो उनका परिवार St. Albans में रहने लगा। वहीं पर हॉकिंग की स्कूली शिक्षा हुई। हॉकिंग शुरू से पढ़ाई में अच्छे थे। और इसी वजह से उनके स्कूल के दोस्त उन्हें आइंस्टीन कहकर बुलाया करते थे। सत्रह साल की उम्र में स्टीफन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया उन्होंने फिजिक्स (physics) विषय चुना था। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। फिर अचानक स्टीफन को रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत आने लगी। उन्हें लगा ये समस्या कमजोरी की वजह से होगी। लेकिन धीरे धीरे समस्या बढ़ने लगी। इसी बीच फर्स्ट डिवीजन से पास होने के बाद हॉकिंग ने आगे की पढ़ाई के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। वहाँ पर इन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स एंड थ्योरेटिकल फिजिक्स से कॉस्मोलॉजी यानी ब्रह्मांड विज्ञान पर रिसर्च की। इस दौरान हॉकिंग के शरीर में कमजोरी के लक्षण दिखाई देते थे। हालांकि हॉकिंग ने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन 1963 में उनकी हालत ज्यादा खराब होने लगी। एक बार छुट्टियों में हॉकिंग घर गए हुए थे और सीढ़ियों से उतरते वक्त वे बेहोश हो गए। जिसके बाद उनके पिता उन्हें अस्पताल ले गए। मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि हॉकिंग को मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी है। जिसे  एमियोट्रॉफ़िक लैटरल स्कलिरॉसिस (Amyotrophic Lateral Sclerosis) यानी ए.एल.एस नाम की बीमारी थी। एएलएस में इंसान के शरीर के अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते हैं। असल में इस बीमारी में इंसान के शरीर की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसें काम करना बंद कर देती थी। और इस वजह से धीरे धीरे इंसान का शरीर भी काम करना बंद कर देता है। इस बीमारी में मरीज के बचने की संभावना काफी कम होती है यहाँ तक कि हॉकिंग के बारे में भी डॉक्टरों ने ये कह दिया था कि वो ज्यादा से ज्यादा दो सालों तक ही जिंदा रह पायेंगे। लेकिन ये हॉकिंग की विल पॉवर ( will power) ही थी कि उन्होंने ने डॉक्टरों को भी गलत साबित किया और इस खतरनाक बीमारी के मरीज होने के बावजूद एक अच्छी खासी उम्र जीकर गए। अपनी बीमारी के बावजूद स्टीफन ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 1965 में पीएचडी की डिग्री हासिल की। पीएचडी में उनकी थीसिस का टाइटल  “प्रॉपर्टीज ऑफ एक्सपैन्डिंग यूनिवर्स” था। एक छोर पर ये बीमारी स्टीफन के हौसले तोड़ने में लगी थी वहीं दूसरी तरफ स्टीफन भी अपनी इस लाइलाज बीमारी को कदम कदम पर मात देते जा रहे थे। धीरे धीरे एक स्टेज ऐसी आई जब स्टीफन के बाएँ हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। धीरे धीरे उनके शरीर के सभी अंग काम करना बंद कर रहे थे। और एक समय ऐसा आया जब स्टीफन को व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि उनके शरीर के ज्यादातर हिस्सों ने काम करना बंद कर दिया था। और इसलिए उनकी व्हील चेयर भी कोई आम व्हील चेयर नहीं थी बल्कि इसमें कंप्यूटर भी अटैच था। जो उनकी उंगलियों के कंपन मात्र से ये पता लगा लेता था कि स्टीफन क्या कहना चाहते हैं और फिर वही मैसेज उनकी व्हील चेयर पर लगी स्क्रीन पर दिखाई देने लगता था। इस बीमारी में स्टीफन के लिए एक प्लस पॉइंट ये था कि ये बीमारी स्टीफन को सिर्फ शारीरिक रूप से कमजोर कर रही थी ना कि मानसिक रूप से और इस बात का स्टीफन खूब फायदा भी उठा रहे थे। उन्होंने अपनी शारीरिक कमजोरी को कभी अपने कॅरिअर में बाधा नहीं बनने दिया। और इसके बाद क्या था हॉकिंग का यही पॉजिटिव एटीट्यूड उन्हें आगे ले गया और हॉकिंग लगातार मौत को मात देते चले गए और दुनिया हैरानी से देखती रही गयी। यहाँ तक कि हॉकिंग का इलाज करने वाले डॉक्टर भी काफी ज्यादा हैरान थे। हॉकिंग ने टाइम ट्रैवल और ब्लैक होल से जुड़े कई ऐसे सिद्धांत दुनिया को दिए जिसके बारे में कल्पना करना भी लोगों के लिए मुश्किल था। 

वैवाहिक लाइफ (Stephan Hawking Married Life): 

Stephan Hawking wife Jane Hawking
(Stephan Hawking with wife Jane Hawking)

अगर स्टीफन की मैरिटल लाइफ की बात करें तो जिस साल हॉकिंग को अपनी बीमारी का पता चला उसी साल उनकी मुलाकात अपनी पहली पत्नी जेन वाइल्ड से हुई थी। हॉकिंग के इस बुरे वक्त में जेन ने उनका साथ दिया और 1965 में दोनों ने शादी कर ली। जेन और हॉकिंग के तीन बच्चे भी थे, जिनका नाम लूसी (Lucy), टिमोथी (Timothy) और रॉबर्ट (Robert)। जेन और हॉकिंग का वैवाहिक जीवन लगभग 30 सालों तक चली इसके बाद दोनों ने तलाक़ ले लिया। तलाक़ के बाद 1995 में हॉकिंग ने ​ऐलेन मेसन के साथ दूसरी की। उनकी ये शादी भी कुछ ही साल चली और 2016 में  ऐलेन और हॉकिंग ने तलाक़ ले लिया।

कैरियर (Stephan Hawking Career) – 

इस खतरनाक बीमारी के बावजूद हॉकिंग (Stephan Hawking) का वैज्ञानिक कैरियर काफी शानदार था। उनके पास कुल 13 Honorary डिग्रियाँ थी। इसके अलावा उनको मिले अवार्ड्स को तो आप अपनी उंगलियों की टिप्स पर नहीं गिन सकते। 1966 में उन्हें एडम्स प्राइज दिया गया।1975 में एडिंगटन मेडल मिला। इसके बाद अगले ही साल 1976 में उन्हें मैक्सवेल एंड Heineman प्राइज से भी पुरस्कृत किया गया। और इसके बाद 1978 में  स्टीफन को मिला अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल। स्टीफन को मिले प्राइज और मेडल की लिस्ट बहुत लंबी है। लेकिन वो ये सब डिजर्व भी करते थे। क्योंकि विज्ञान जगत में उनके योगदान भी बहुत कमाल के हैं। उन्होंने अपने साथी researchers के साथ मिल कर ब्रह्मांड के बेसिक नियमों पर शोध किया और बताया कि space और time ब्रह्मांड की शुरुआत के साथ ही उत्पन्न हुआ था। और अब ये ब्लैक होल में ही खत्म होगा। उन्होंने  आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेविटी और क्वांटम थ्योरी की मदद से ये भी बताया कि ब्लैक होल्स पूरी तरह शांत नहीं है बल्कि वो भी  रेडिएशन उत्पन्न करते हैं।  इसके अलावा हॉकिंग ने यूनिवर्स के विषय में “ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम”, “द यूनिवर्स इन ए नटशेल”, ” द ग्रांड डिजाइन” , ब्लैक होल एंड बेबी यूनिवर्स “। जैसी किताबे भी लिखी। 

दोस्तों इतनी बड़ी बीमारी जिसमें आपका पूरा शरीर ही काम करना बंद कर दे। इसके बावजूद एक आम इंसान की तरह जीवन जीना और अपने सपनों को साकार करना कोई आसान बात नहीं है। लेकिन हॉकिंग ने ये सिद्ध कर दिया कि अगर आपके मन में कुछ कर दिखाने का जज़्बा है तो दुनिया की कोई ताकत आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकती। अपने जीवन के लगभग 53 साल व्हील चेयर पर बिताने के बाद छिहत्तर साल की उम्र में इस महान वैज्ञानिक ने 14 मार्च 2018 को दुनिया को अलविदा कह दिया। भले ही हॉकिंग का शरीर इस दुनिया में नहीं है लेकिन विज्ञान जगत उनकी थ्योरीज और योगदानों को कभी भुला नहीं पाएगा वो सदियों सदियों तक हमारे मन में जीवित रहेंगे। 

Stephan Hawking death

स्टीफन हॉकिंग द्वारा दी गयी थ्योरीज (Stephan Hawking Theories): 

1) बिग बैंग थ्योरी (The Big Bang Theory) :

स्टीफन हॉकिंग का कहना था कि दुनिया, आकाश गंगाएँ, सौरमंडल बिगबैंग के कारण ही अपने अस्तित्‍व में हैं। हॉकिंग का कहना था कि बिग बैंग के विघटन से ही तमाम तारा मंडल, ग्रह और आकाश गंगाएं अस्तित्‍व में आईं। बिग बैंग से ही हमारी दुनिया का निर्माण हुआ और आज तक ब्रह्मांड धीरे धीरे एक्स्पैंड हो रहा है। स्टीफन ने ये भी बताया कि यूनिवर्स के शुरू होने के साथ ही टाइम की भी शुरुआत हुई।

2) ब्लैक होल थ्योरी (The Black Hole Theory) :

वैसे तो हॉकिंग ने फिजिक्स के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण थ्योरीज दी थी लेकिन उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान है ब्लैक होल थ्योरी। 1974 में उन्होंने ये थ्योरी दी थी जिसमें हॉकिंग ने बताया कि ब्लैक होल्स से रेडिएशन निकलते हैं। बाद में हॉकिंग के सम्मान में इसे हॉकिंग रेडिएशन नाम दिया गया। 

3) आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) :

दोस्तों विज्ञान की कई बड़ी बड़ी थ्योरी देने वाले स्टीफन हॉकिंग हमेशा से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हम इंसानों के लिए खतरा मानते आये हैं। उनका कहना था कि इंसान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक विकसित करके अपने लिए ही खतरा उत्पन्न कर रहा है। हो सकता है अभी आप ये बात ना समझ रहे हों पर सोचिए अगर हमने ऐसे रोबोट्स बना लिए जो इंसानों से ज्यादा समझदार हुआ तो हो सकता है ये हमें ही कंट्रोल करने लगे क्योंकि ए। आई। (AI) इंटरनेट पर बेस्ड रहता है। और इनका प्रोसेसर भी हमारे दिमाग से कई गुना तेज होगा। इसलिए इसके लिए इंटरनेट से इंफोर्मेशन जुटाना हमसे कहीं ज्यादा आसान होगा। और ऐसे में शायद स्थितियाँ कुछ वैसी ही हो जाए जैसी आपने किसी फिल्म में इंसान और रोबोट की फाइट्स देखी होगी। 

4) एलियन (Alien theory): 

हॉकिंग ये भी नहीं चाहते थे कि इंसान एलिन्स को कांटैक्ट करने की कोशिश करे उल्टा उनका तो ये मानना था कि अगर अंतरिक्ष में कहीं से सिग्नल्स आते हैं तो हमें उनका जवाब देने से भी बचना चाहिए। क्योंकि एलिन्स हमारे लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। आप खुद ही सोचिए कि अगर एलियन्स हमसे ज्यादा समझदार और ताकतवर हुए तो ? वे हम पर हमला भी तो कर सकते हैं। और अगर मान लिया कि वो शांतिप्रिय हुए तो भी कोई गारंटी नहीं है कि हम उनसे सुरक्षित होंगे क्योंकि जिस तरह हम इंसान बाकी सभी जीवों से ज्यादा इंटेलिजेंट हैं और शांतिप्रिय भी हैं। लेकिन हम उनका इस्तेमाल लैब्स में कई तरह के प्रयोगों के लिए करते हैं ना ? तो सोचिए कि ऐसा भी तो हो सकता है कि एलिन्स हमें एक्सपेरिमेंटल ऑब्जेक्ट की तरह इस्तेमाल करें। अब शायद आपको वो खतरा समझ आ गया होगा जिसे हॉकिंग सालों पहले ही भाँप गए थे।

5) जलवायु परिवर्तन (Climate change concerns):

हॉकिंग (stephan hawking) ने जलवायु परिवर्तन को मानव जाति के लिए एक गंभीर समस्या बताया था। उनका कहना था कि तेजी से बढ़ती पॉपुलेशन, जलवायु में बदलाव, और उल्का पिंडों के टकराव से बचने के लिए हम इंसानों को एक नया ग्रह ढूँढ लेना चाहिए जहाँ पर जीवन संभव हो। अगर हम ऐसा नहीं कर पाए तो 100 साल बाद पृथ्वी पर इंसानों का बचे रह पाना मुश्किल होगा 

स्टीफन हॉकिंग की पुस्तकें (Stephan Hawking’s books): 

स्टीफन हॉकिंग (stephan hawking) ने कई किताबें लिखी जिनमें उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान और गणित के कई रहस्यों और अपने शोध के दौरान पता चली बातों को समझाया। हॉकिंग के द्वारा लिखी गयी मुख्य किताबें अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम, (A Brief History of Time), मेरा संक्षिप्त इतिहास (My brief History, The Grand Design, Black Holes and Baby Universes, The universe in a Nutshell, On the Shoulders of Giants और God Created the Integers)इत्यादि हैं। विज्ञान और स्पेस साइंस के बारे में लिखी गयी हॉकिंग की किताबों के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को ही ये पता होगा कि हॉकिंग ने अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले बच्चों की लिए चिल्ड्रेन बुक सीरी़ज भी लिखी थी। इन किताबों को उन्होंने अपनी बेटी लूसी हॉकिंग के साथ मिलकर लिखा था। जॉर्ज की यूनिवर्स की सीक्रेट की (George’s Secret Key to the Universe) और (George’s Cosmic Treasure Hunt) इसी सीरी़ज की किताबें हैं।

स्टीफन हॉकिंग (stephan hawking) जैसे महान वैज्ञानिक, विज्ञान जगत के लिए एक नायाब नगीना है। हॉकिंग भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन स्पेस साइंस से जुड़ी उनकी रिसर्च और अविष्कार हम सभी के लिए एक बहुमूल्य भेंट हैं। इसके अलावा अगर आप अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि नहीं भी रखते तब भी उनका जीवन आपके लिए काफी प्रेरणादायी हो सकता हैं क्योंकि जिस तरह उन्होंने अपनी इस लाइलाज बीमारी से लड़ते हुए इतनी सफलता हासिल की। तो फिर हमारे और आपके लिए तो अपने लक्ष्य को हासिल करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो सच्ची लगन और मेहनत से प्रयास करने की। 

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