Top Future Projects of ISRO in Hindi इसरो के 10 नए आने वाले प्रोजेक्ट्स

Top 10 Future Projects of ISRO kaun se hain? Space Exploration ki race me Kitna aage nikalne wala hai India? ISRO centre me Kaun se projects par kaam chal raha hai? Come let’s find out..

Top Future Projects of ISRO in Hindi इसरो के 10 नए आने वाले प्रोजेक्ट्स

चंद्रयान 2 की आंशिक असफ़लता के बाद बिना एक भी सेकंड और गंवाए इसरो से जुड़े सभी वैज्ञानिक वापस से अपने काम मे जुट गए हैं। इसरो वह काम फिर से कर रहा है जो वह सबसे बेहतर करता है, वह ये कि अपनी इंजीनियरिंग की काबिलियत से भारत की अंतरिक्ष की समझ को और अधिक विकसित और गहन बनाना। 

अब इसरो के पास और भी अधिक एम्बीशियस योजनाएँ हैं, जिन पर वह तेजी से काम कर रहा है, फिर चाहे वो अंतरिक्ष तक भारतीय मानव को ले जाना हो या फिर शुक्र ग्रह के वातावरण की जांच करना या फिर सूर्य की सतह कोरोना के नजदीक तक जाना ही क्यूं ना हो। 

आने वाले कुछ सालों मे, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र, इसरो द्वारा करीब 36 नए अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किए जाने हैं, जिसमें चन्द्रमा और मंगल से जुड़े मिशन भी शामिल हैं। अगर आप इन मिशन के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं तो आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें. 

1). 2019-20 Aditya L1 mission (आदित्य एल 1 मिशन) 

सूर्य की सबसे बाहरी सतह, कोरोना कई किलोमीटर बाहर तक फैली हुई है। लेकिन इसके बावज़ूद ये बाहरी सतह सूर्य से कहीं ज्यादा गर्म है। एक ओर जहां सूर्य का तापमान 5800 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, वहीं इसकी सतह कोरोना का तापमान 10 लाख डिग्री सेल्सियस के आसपास तक पहुंच जाता है। विभिन्न देशों के अंतरिक्ष वैज्ञानिक आज तक सूर्य और उसकी बाहरी सतह के तापमान मे इतने बड़े अन्तर के पीछे की वजह नहीं ढूँढ पाए हैं। 

इस कारण का पता लगाना इसरो के आदित्य एल 1 मिशन के कई महत्वपूर्ण कार्यों मे से एक होगा। इसरो का आदित्य एल 1 प्रॉब सूर्य से जुड़े अनेक रहस्यों के बारे मे जानकारी जुटाने के लिए करीब 15 लाख किलोमीटर तक का सफर तय करेगा। 

य़ह प्रॉब अपने साथ छह पे-लोड लेकर जाएगा जिसमें अलग अलग तरह के वैज्ञानिक उपकरण होंगे, जिनकी मदद से सूर्य से जुड़ी विभिन्न जानकारियां हासिल की जा सकेंगी। 

इसरो द्वारा आदित्य एल 1 प्रॉब को साल 2020 तक लॉन्च करने की तैयारी की जा रही हैं। 

Aditya L1 mission most awaited among Top Future Projects of ISRO.

2) December 2021/ January 2022: Gaganyaan Mission – Human Spaceflight (गगनयान मिशन) 

साल 1984 मे भारतीय वायुसेना के स्क्वॉड्रन लीडर राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। लेकिन उस समय वे सोवियत यूनियन के अंतरिक्ष मिशन मे दो अन्य सोवियत अंतरिक्ष यात्रियों के साथ सोयुज टी- 11 मे अंतरिक्ष की ओर गए थे। तब ना ही वह मिशन भारतीय था और ना ही वह अंतरिक्ष यान भारत मे बना था। गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। भारतीय अंतरिक्ष यान गगनयान साल 2022 मे लॉन्च किया जाएगा, जिसमें पहली बार तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्री सात दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। 

ये अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायु सेना मे से चुने जाएंगे और रूस द्वारा इन्हें अंतरिक्ष मे जाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

10000 करोड़ रुपये की लागत वाला यह मिशन इसरो द्वारा विकसित की गई नई तकनीक का प्रयोग करेगा जिसमें कि मिशन की री- एंट्री की क्षमता, क्रू एस्केप सिस्टम, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम और लाइफ सपोर्ट सिस्टम शामिल हैं। 

Gaganyaan Mission–Human Spaceflight.

3) 2022- 2023 : Mangalyaan- 2 (Mars Orbiter Mission – 2) (मंगलयान – 2)

मंगल ग्रह पर भारत के दूसरे मिशन, मार्स ऑर्बिटर – 2, को साल 2022 से 2023 के बीच इसरो द्वारा लॉन्च किया जाएगा। मंगल यान 2 का ऑर्बिटर एरोब्रेक्स की मदद से अपने शुरुआती अपॉप्सिस पॉइंट की दूरी को कम करके, किसी ऐसे ऑर्बिट मे उतरेगा जहां से उसे अॉब्जर्वेशन करने मे आसानी हो। मंगल पर इसरो का ये दूसरा प्रोजेक्ट होगा. इससे पहले मंगल के लिए ही मार्स ओरबीटल मिशन, इसरो ने लांच किया था. वो पूरी तरह से सफल था. वो स्पेस की फील्ड में सबसे सस्ता मिशन था. 

Mangalyaan – 2 Mom.

4) Late 2020s :Chandrayaan- 3 Mission (चंद्रयान – 3 मिशन) 

चंद्र यान 3 एक रोबॉटिक स्पेस मिशन है। जिसके अंतर्गत जापान की एजेन्सी JAXA के साथ इसरो साल 2024 तक चंद्रमा के साउथ पोल तक लूनर रोवर और लैंडर भेजेंगे। इस मिशन के लिए जाक्सा का एच 3 वीइकल और रोवर और इसरो द्वारा निर्मित लैंडर  प्रयोग किया जाएगा। चंद्रयान 2 के बाद इस मिशन से इसरो को और भारत के लोगों को बहुत ज्यादा उम्मीद है. चंद्रयान 2 की तरह ही इस मिशन का भी मुख्य उद्देश्‍य चाँद की डार्क साइड को एक्सप्लोर करना होगा. 

5) 2023- 2025: Shukrayaan Mission to Venus (शुक्र यान मिशन : शुक्र की ओर) 

भारतीय ज्योतिषशास्त्र मे, शुक्र को बुरा समय लेकर आने वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्योंकि यह अंतरिक्ष मे हमारा सबसे नजदीकी ग्रह है, शायद इसीलिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक शुक्र ग्रह पर अध्ययन और खोज करना चाहते हैं। साल 2023 से 2025 के बीच, इसरो शुक्र ग्रह के वातावरण के अध्ययन के लिए एक ऑर्बिटर मिशन रवाना करेगी। शुक्र ग्रह पृथ्वी के मुकाबले सूर्य के 30 % ज्यादा नजदीक है, जिस वज़ह से उसका वातावरण ज्यादा घना और गर्म है। यह मिशन शुक्र ग्रह के वातावरण और इस पर सोलर रेडिएशन के प्रभाव का अध्ययन करेगा। 

शुक्र को अक्सर पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है। शुक्र आकार मे पृथ्वी से थोड़ा सा बड़ा है, लेकिन इन दोनों ही ग्रहों की डेंसिटी, संरचना और ग्रेविटी लगभग एक जैसी ही हैं। इतना ही नहीं पृथ्वी और शुक्र इन दोनों ग्रहो का निर्माण 4.5 बिलियन साल पहले एक ही प्रकार की गैसों से हुआ था। 

Shukrayaan Mission to Venus.

6) Late 2020s : EXPOsat Planetary exploration (एक्सपोसैट प्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन ) 

इसरो अपने सफल एस्ट्रो सैट मिशन के बाद एक्सपो सैट को लॉन्च करने की तैयारी बना रहा है। इसरो की मल्टी वेवलेंथ एक्स रे एस्ट्रोनॉमी अॉब्जर्वेटरी ब्रह्मांड मे एक्स रे के विभिन्न स्त्रोतों की खोज कर रही है। एस्ट्रो सैट मिशन की बड़ी सफलता को देखते हुए, एक्सपो सैट मिशन से नई एक्स रेज़ को खोजने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, खासकर हमारे ब्रह्मांड मे ब्राइट एक्स रे सोर्स के पोलराइजेशन के कारण को समझने की उम्मीद। 

ऑब्जेक्ट्स जैसे कि न्यूट्रॉन स्टार, सुपर नोवा, पल्सर या ब्लैक होल के आसपास का रीजन भी वैज्ञानिकों को स्पेस रेडिएशन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक नेचर की जानकारी दे सकते हैं। स्पेस रेडिएशन की बेहतर समझ से हम भविष्य मे ना सिर्फ अपने स्पेस क्राफ्ट्स और अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचा सकते हैं, बल्कि इससे हम ब्रह्मांड मे होने वाली घटनाओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। 

7) 2023 : India’s Space Station (भारत का स्पेस स्टेशन) 

इसरो के नए प्रोजेक्ट्स की कतार मे भारत का अपना स्पेस स्टेशन भी शामिल है। वर्तमान में, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ही इकलौता ऐसा स्पेस स्टेशन है जो ठीक से कार्य कर रहा है, लेकिन वह भी सिर्फ साल 2028 तक ही कार्य कर सकेगा। भारत के प्रस्तावित स्पेस स्टेशन का वजन 15 से 20 टन का होगा, जिसमें 15 से 20 दिन तक अंतरिक्ष यात्री रुक पाएंगे। इसका प्रयोग माइक्रो ग्रैविटी के प्रयोग करने के लिए किया जाएगा। 

भारत का यह स्पेस स्टेशन असल मायने मे 10000 करोड़ रुपये की लागत वाले गगन यान मिशन का एक बड़ा रूप है। गगन यान मिशन के जरिये इसरो की साल 2022 तक अंतरिक्ष मे मानव को भेजने की योजना है। 

Indian Space Station is one of the most important Top Future Projects of ISRO India.

8) PSLV C45- Launching satellites from three different orbits (पीएसएलवी सी45)

सभी देशों के बीच छिड़ी अंतरिक्ष रेस मे, भारत को भी पीछे छूटना मन्जूर नहीं है। इसीलिए भारत अब अपना पहला तीन ऑर्बिट वाला स्पेस मिशन पीएसएलवी सी45 के जरिए लॉन्च करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस मिशन के द्वारा तीन अलग अलग ऑर्बिट मे करीब 30 सेटलाइट को स्थापित किया जाएगा। इसरो के अनुसार, इन 30 सेटलाइट मे से एक खास सेटेलाइट को विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजंस का कार्य सौंपा गया है। ऑफिशियल्स की माने तो इस मिशन मे सबसे खास बात यही है कि पहली बार पीएसएलवी की मदद से तीन अलग अलग ऑर्बिट मे सेटेलाइट भेजे जा रहे हैं। 

9) SSLV: small satellite launch vehicle (एसएसएलवी) 

इसरो द्वारा विकसित की गई स्मॉल सेटेलाइट लांच वीइकल का वजन करीब 110 टन के करीब है। जबकि बड़े लॉन्च वीइकल को असेंबल करने के लिए करीब 70 दिनों का समय और 100 से ज्यादा लोगों की आवश्यकता होती है , वहीं इस स्मॉल लॉन्च वीइकल को मात्र 72 घंटों मे 6 लोगों की मदद से आसानी से असेंबल किया जा सकेगा। इसरो के कॉमर्शियल आर्म को बढावा देने के लिए एसएसएलवी विकसित किए जाते हैं ताकि छोटी और निजी सेटेलाइट को लॉन्च करने मे ज्यादा कठिनाई का सामना करने से बचा जा सके। 

SSLV Model

10) Nisar satellite (निसार सैटलाइट) 

नासा- इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार, संक्षेप में निसार सेटेलाइट को पृथ्वी की कुछ बहुत जटिल प्रक्रियाओं को मापने और परखने के लिए तैयार किया गया है। एडवांस्ड रडार इमेज के जरिये निसार सेटेलाइट धरती की ऐसी गहन तस्वीरें भेजेगा, जिससे कि वातावरण की हलचलें, बर्फ की चादर पिघलने, और अलग अलग प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि भूकंप, सुनामी, भूस्खलन और ज्वालामुखी के फटने आदि से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सके। वर्ष 2020 तक निसार सेटेलाइट को लॉन्च करने की योजना बनाई गई है। 

इस साल भारतीय अनुसंधान केंद्र सामाजिक – आर्थिक सुरक्षा और सतत विकास से संबंधित राष्ट्रीय योजनाओं पर भी काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय भू स्थैतिक ऊर्जा सूचना प्रणाली और बढ़ी हुई भू अवलोकन क्षमताएं भी शामिल हैं। 

NISAAR Satellite

तो दोस्तों ये थे Top Future Projects of ISRO. हमें कमेन्ट करके बताइए कि इनमें से किसका आप बेसब्री से कर रहे हैं इंतजार. पोस्ट को पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद.