Unemployment in India: ‘भारत में बेरोजगारी’ पर हिंदी निबंध

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Analysis of Unemployment in India: भारत में बेरोजगारी पर निबंध

दुनिया के मौजूदा सबसे अमीर इंसान Elon Musk (एलन मस्क) ने एक बार अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि “मैं कभी हार्वर्ड नहीं गया ना ही मैं कभी स्टेन फोर्ड गया हूं लेकिन हार्वर्ड और स्टेन फोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े स्टूडेंट मेरे पास काम करते हैं. इस बात का मुझे कोई घमंड नहीं है. लेकिन मैं उनसे ज्यादा स्किल्ड हूं ये मैं जानता हूं.” एलन मस्क की ये बातेँ आपको बहुत ज्यादा घमंड से भरी लग सकती हैं लेकिन एलन मस्क के बारे में सबसे खास बात ये है कि वो कभी भी बेरोजगार नहीं रहे. उनकी पहली जॉब में वो एक टाउन में सब्जियां बेच रहे थे. उस वक़्त उनके माइंड में जरूर था कि उन्हें एक Tech Entrepreneur बनना है लेकिन फिर भी वो एक mediocre job कर रहे थे क्योंकि वो बेरोजगार नहीं रहना चाहते थे और आज के हमारे टॉपिक Unemployement in India का एक बड़ा पॉइंट है. 

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Unemployment in India and Service Sector: बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की चाह

Unemployment in India के बारे में बात करते हैं समय जो सबसे बड़ी गलती हमारे यहां के लोग करते हैं, वो ये है कि वो सभी age groups को एक ही में मिला देते हैं. डाटा ये कहता है कि हमारे देश के 100 प्रतिशत बेरोजगार लोगों में से लगभग 60% लोग 20 से 29 के Age Group से आते हैं और हैरानी की बात ये है कि 30 से 35 तक पहुंचते ही ये प्रतिशत 5 पर आ जाता है और 35 से 39 तक पहुंचने पर ये 1 पर आ जाता है. कहा आप इस ट्रेंड के पीछे का कारण समझ सकते हैं. इसका सीधा सा जवाब है सरकारी नौकरी. 20 से 29 साल के बीच के लोग बेरोजगार होते हैं क्योंकि वो एक सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे होते और अगर इसे दूसरे शब्दों में कहा जाए तो वो खुद को बेरोज़गार बनाकर रखते हैं ताकि वो सरकारी नौकरी की तैयारी कर सकें और क्या इसमे उनकी गलती है? बिल्कुल भी नहीं. फिर बात यहां पर लौटकर एजुकेशन सिस्टम पर आ जाती है. हमारा Education System. जिस तरह की Education Provide कर रहा है वो लोगों को Skill नहीं दे रही है. यानी कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए एक लड़के को भी UPSC की तैयारी ही करनी पड़ती है और ओपन से पढ़ने वाला एक लड़का भी सरकारी नौकरी की तैयारी करता है. अगर इन्हें Skill सीखाइ जाती तो शायद ये Mediocre job करते और अपनी सीढिया चढ़ने की कोशिश करते. लेकिन ये सभी स्टूडेंट. सरकारी नौकरी के जाल में फंस जाते हैं क्योंकि बिना स्किल की जो डिग्रियां इन बेचारों को मिली है, उनसे इन्हें जो नौकरी मिले, उसमे ये पूरी जिंदगी नौकर ही बनकर रहेंगे. 

दोस्तों बेरोजगारी का हवन, वो हवन है जिसमें लगभग हर किसी ने आहुति दी है. चाहे वो हमारे देश की अगली पिछली सरकारें हो, सोसायटी हो, समाज हो या फिर खुद स्टूडेंट के फैमली वाले हों. आपको एक फैक्ट जानकर बहुत ज्यादा हैरानी होगी कि अगर सरकार की हर Ministry का हर Department भर दिया जाए और एक भी. जी हां एक भी कुर्सी खाली ना छोड़ी जाए तब भी केवल 1% से भी कम लोगों को सरकारी रोजगार मिल पाएगा. ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि क्या प्राइवेट नौकरी में स्कोप है. 

है भी और नहीं भी. अगर आप आईआईटी और आईआईएम के बाद मिलने वाली प्राइवेट नौकरी की बात करो तो बहुत स्कोप है. लाखों का पैकेज है, करोड़ों opportunity है. लेकिन फिर वहीँ सब कुछ घूमकर आ जाता है कि आखिर कितने स्टूडेंट इस तरह की job ले पाते हैं. मुश्किल से पूरे देश की आबादी के 0.01 प्रतिशत. बाकी के 98% बेचारे इन नौकरियों की तैयारी करते हैं और उसके बाद उन्हें 30 साल की उम्र के बाद जब ये नौकरी नहीं मिलती और उनकी उम्र भी बीत चुकी होती है तब वो mediocre जॉब करके, जैसे तैसे अपने घर का खर्चा चलाते हैं. जिंदगी भर खुद को Looser समझने का Guilt अलग से उन्हें खाता रहता है. 

लेकिन क्या सच में उनकी गलती है? नहीं उनकी गलती नहीं है. गलती है उस Mindset की. जिसने उन्हें ये कहा कि 20 से 30 के अपने कीमती सालों को सरकारी नौकरी की तैयारी में लगा दो. जब कि तुम अपना सब कुछ देकर, अपने पैसन के हिसाब से एक अच्छे क्रिकेटर, शेफ, Entrepreneur, फोटोग्राफर, एक्टर, Musician, Politician, Racer, Footballer, वगैरह वगैरह कुछ भी बन सकते हैं. लेकिन ये अपने क़ीमती सालों को व्यर्थ करते हैं उस 1% की opportunity को पाने के लिए जिसे जीत गये तो Fun है और हार गए तो जिन्दगी भर का ग़म है. 

हाँ competition एक अच्छी चीज है और बिना Competition के कोई Field नहीं है, लेकिन मेरे भाई Competion तो तुम वहाँ करोगे ना जहां तुम खुद को dedicate कर सकते हो. इतने बड़े स्तर पर Unemployment in India की वजह यही है कि हमने अपने Youth को रिस्क लेना नहीं सिखाया और उन्हें सरकारी नौकरी के दलदल में धकेल दिया है जो कि indirectly सबसे बड़ा risk है. 

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